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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए मानहानि की शिकायत रद्द करने से इनकार कर दिया था।
‘कमांडर-इन-थीफ’ टिप्पणी से जुड़ा है मामला
यह विवाद राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों से संबंधित है, जिनमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘चोरों का सरदार’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने इसे मानहानिकारक बताते हुए मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन बयानों से प्रधानमंत्री के साथ बीजेपी और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। इसी शिकायत पर मजिस्ट्रेट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था।
राहुल गांधी ने समन को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि उनकी टिप्पणी में किसी विशिष्ट व्यक्ति या स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकने वाले समूह का उल्लेख नहीं था। ऐसे में शिकायतकर्ता को उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की थी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आठ सितंबर को राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि शिकायतकर्ता लंबे समय से बीजेपी का सक्रिय सदस्य होने का दावा करता है। शुरुआती चरण में यह तय करना संभव नहीं है कि टिप्पणी केवल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक सीमित थी या उसका प्रभाव अन्य सदस्यों पर भी पड़ा। हाईकोर्ट के अनुसार, बयान का वास्तविक अर्थ और उसके प्रभाव का आकलन ट्रायल के दौरान किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में शशि थरूर से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया था, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने पंजीकृत राजनीतिक दल को पहचान योग्य संस्था माना था।
सुप्रीम कोर्ट में अब आगे की सुनवाई
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। शीर्ष अदालत ने अब संबंधित पक्षों से जवाब मांगते हुए निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। मामले में आगे का फैसला पक्षकारों के जवाब और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद होगा।






