2029 के लोकसभा चुनाव से पहले दक्षिण भारत की राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो रही हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के बीच मुकाबले के साथ क्षेत्रीय दलों की रणनीति भी अहम होती जा रही है। इस बीच आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के बदले रुख और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को हवा दी है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने हाल में स्वीकार किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को समर्थन देना उनकी बड़ी राजनीतिक भूल थी। वर्ष 2023 में बने इस कानून के तहत नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री, उनके द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं। आलोचकों का कहना है कि इस व्यवस्था में केंद्र सरकार का प्रभाव अधिक रहता है।
जगन के इस बयान को एनडीए से उनकी संभावित दूरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अब तक किसी नए गठबंधन में शामिल होने या इंडिया ब्लॉक का समर्थन करने को लेकर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम पर सबकी नजर है।
नायडू और विजय की मुलाकात के सियासी मायने
दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू की टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय से मुलाकात भी चर्चा में है। विजय हाल ही में आंध्र प्रदेश में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘विजयवाड़ा उत्सव 2.0’ में शामिल हुए थे। इस दौरान नायडू ने उनका स्वागत किया।
राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ दक्षिण भारत के नेताओं के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं। आंध्र प्रदेश बीजेपी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, नायडू इस मुलाकात से राजनीतिक लाभ हासिल करने की संभावनाएं तलाश सकते हैं।
फिलहाल नायडू एनडीए के प्रमुख सहयोगी बने हुए हैं, जबकि जगन रेड्डी ने अपनी भविष्य की गठबंधन रणनीति स्पष्ट नहीं की है। ऐसे में इन घटनाक्रमों को किसी नए गठबंधन का पक्का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि 2029 की चुनावी तैयारी के बीच दक्षिण भारत के क्षेत्रीय दलों की रणनीति राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट






