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झारखंड पुलिस में बैकडेटिंग का आरोप! 50+ दारोगाओं के बैच में बदलाव, जांच की मांग तेज

by उर्वशी शेखर
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झारखंड पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी वर्ष 2026 की पुलिस अवर निरीक्षक (एसआई) वरीयता सूची में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि सूची तैयार करते समय 50 से अधिक पुलिसकर्मियों के प्रमोशन वर्ष और बैच में बदलाव कर दिया गया। बताया जा रहा है कि जिन कर्मियों को वर्ष 2018 में दारोगा के पद पर पदोन्नति मिली थी, उन्हें नई सूची में वर्ष 2014 बैच का दर्शाया गया है। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो इससे पुलिस विभाग में वर्षों से निर्धारित वरिष्ठता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

2003 में हुई थी स्टेनो कैडर के कर्मियों की बहाली

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मामले की जड़ वर्ष 2003 में हुई भर्ती से जुड़ी है। उस दौरान झारखंड पुलिस में स्टेनो कैडर, जिसे गोपनीय प्रवाचक संवर्ग भी कहा जाता है, के तहत 50 से अधिक कर्मियों की नियुक्ति हुई थी। इनमें संतोष कुमार महतो समेत कई अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।

पुलिस मुख्यालय के पूर्व में जारी आदेश के मुताबिक, इस संवर्ग के सहायक अवर निरीक्षकों (एएसआई) को 4 अगस्त 2018 को पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया था। संबंधित आदेश में प्रमोशन और पदस्थापन की प्रक्रिया का उल्लेख भी वर्ष 2018 के संदर्भ में किया गया था।

नई सूची में कैसे बदल गया बैच?

विवाद तब गहराया, जब पुलिस मुख्यालय के कार्मिक कोषांग की ओर से वर्ष 2026 में नई राज्य वरीयता सूची जारी की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 19 मई 2026 के ज्ञापांक 225/पी. से संबंधित इस सूची को 29 मई 2026 को जारी किया गया था। आरोप है कि इसमें वर्ष 2018 में एसआई बने संबंधित पुलिसकर्मियों को 2014 बैच में शामिल कर दिया गया।

इस बदलाव के कारण वरिष्ठता क्रम में बड़ा अंतर पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि इससे ऐसे पुलिसकर्मी अपने से पहले पदोन्नत हुए अधिकारियों से भी ऊपर पहुंच गए, जबकि उनकी वास्तविक पदोन्नति बाद में हुई थी। अब इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि सूची तैयार करने के दौरान संबंधित अभिलेखों का मिलान किस आधार पर किया गया और बैच निर्धारण में बदलाव की अनुमति किसने दी।

वरिष्ठता विवाद से पुलिस महकमे में नाराजगी

वरीयता सूची में कथित विसंगति सामने आने के बाद पुलिस विभाग के भीतर असंतोष बढ़ने की बात कही जा रही है। प्रभावित अधिकारियों का मानना है कि वरिष्ठता का निर्धारण निर्धारित नियमों और आधिकारिक सेवा अभिलेखों के आधार पर होना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की अनुचित फेरबदल से अधिकारियों के प्रमोशन और भविष्य की सेवा संबंधी संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

मामले में मुख्यालय स्तर पर संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि इस संबंध में किसी अधिकारी की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रभावित पुलिसकर्मियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही, संबंधित आदेशों और सेवा अभिलेखों की जांच के बाद त्रुटियों को दूर कर संशोधित वरीयता सूची जारी करने तथा यदि अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई गई है। फिलहाल, इस मामले में जांच या आधिकारिक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में अब निगाहें पुलिस मुख्यालय के अगले कदम पर टिकी हैं।

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