बिहार के हाजीपुर में मंगलवार देर शाम नाव पलटने से 14 बच्चों की मौत हो गई। हादसा राघोपुर के रामपुर श्यामचंद गांव के पास हुआ, जहां 20 से अधिक लोग नाव पर सवार थे। मृतक बच्चों की उम्र 10 से 14 वर्ष के बीच बताई जा रही है। दुर्घटना के बाद एसडीआरएफ की टीम ने नाव को नदी से बाहर निकाला, तो उसके एक हिस्से में बड़ा छेद मिला। इससे नाव की जर्जर हालत और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रत्यक्षदर्शी रवि यादव के अनुसार, बच्चे पास के एक गांव में भोज खाने गए थे। इसी दौरान नाव नदी में पलट गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नाव वर्षों से ग्रामीणों के आवागमन में इस्तेमाल हो रही थी, लेकिन उसकी हालत काफी खराब हो चुकी थी।
नाव की हालत पर उठे सवाल
नाव में बड़ा छेद मिलने के बाद आशंका जताई जा रही है कि उस पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे। इससे नाव का संतुलन बिगड़ा और वह पलट गई। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बाढ़ प्रभावित राघोपुर क्षेत्र में नदी पार करने के लिए नावों पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में नाव की नियमित जांच, मरम्मत और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जर्जर नाव को इस्तेमाल में बने रहने कैसे दिया गया।राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी नाव की खराब स्थिति का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये देने की घोषणा की है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है।
इस हादसे में 14 बच्चों की जान जाने के बाद अब नावों की सुरक्षा, रखरखाव और जिम्मेदारी तय करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी है कि जल परिवहन के साधनों की नियमित जांच हो और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट






