ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच कोटिया गांव को लेकर सीमा विवाद एक बार फिर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि कोटिया में आंध्र प्रदेश की चुनावी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सरकार ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है।

चुनावी वादों पर BJP को घेरानवीन पटनायक ने अपने पत्र में 2024 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भाजपा ने कोटिया विवाद के स्थायी समाधान और ओड़िया अस्मिता की रक्षा का भरोसा दिया था। अब राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बावजूद विवाद का समाधान नहीं होने पर उन्होंने जवाब मांगा है।
TDP से गठबंधन का दबाव?
पटनायक ने केंद्र की NDA सरकार में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की अहम भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि गठबंधन की राजनीतिक मजबूरियां कहीं ओडिशा के हितों पर भारी तो नहीं पड़ रही हैं। उन्होंने वर्ष 2025 में कोटिया विवाद के समाधान के लिए गठित 16 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री माझी से विवाद के समाधान के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य की जमीन, क्षेत्रीय अखंडता और ओड़िया अस्मिता की रक्षा सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
कोटिया विवाद को लेकर नवीन पटनायक के सवालों के बाद राज्य की भाजपा सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। अब मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की प्रतिक्रिया पर नजरें टिकी हैं।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट






