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कौन हैं झारखंड के ‘दो आर’, जिनके इशारे पर कांप रहे कारोबारी और ठेकेदार?

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बावजूद रंगदारी और धमकी का नेटवर्क नए चेहरों के साथ सक्रिय होता दिख रहा है। अमन साहू, अमन सिंह और सुजीत सिन्हा जैसे कुख्यात अपराधियों के दौर के बाद अब राहुल सिंह और राहुल दुबे के गिरोह पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। अपराध जगत में इन दोनों को ‘दो आर’ के नाम से जोड़ा जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, दोनों विदेश में रहकर राज्य में अपने नेटवर्क के जरिए आपराधिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

इन गिरोहों की कार्यशैली में एक खास पैटर्न सामने आया है। पहले कारोबारी, ठेकेदार या किसी संस्थान को निशाना बनाकर रंगदारी मांगी जाती है। मांग पूरी नहीं होने पर धमकी या फायरिंग की जाती है। इसके बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर वारदात की जिम्मेदारी लेने और अपनी दहशत का प्रचार करने की कोशिश होती है। हाल में राहुल दुबे गैंग की ओर से सीसीएल के सीएमडी को धमकी दिए जाने का मामला भी सामने आया है। इससे सरकारी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी इनके निशाने पर आने लगे हैं।

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विदेश में बैठे सरगनाओं के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस

झारखंड पुलिस मुख्यालय ने राहुल सिंह और राहुल दुबे की तलाश तेज करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र सिंह के अनुसार, दोनों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है। पुलिस का दावा है कि विदेश में रहते हुए ये अपने स्थानीय गुर्गों के माध्यम से कारोबारियों, ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों से रंगदारी वसूलने का दबाव बनाते हैं।

रंगदारी नहीं मिलने पर फायरिंग और धमकी जैसी घटनाओं में भी इन गिरोहों की संलिप्तता सामने आती रही है। विदेश से नेटवर्क संचालित होने के कारण सरगनाओं तक पहुंचना पुलिस के लिए मुश्किल रहा है। रेड कॉर्नर नोटिस के जरिए अब उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।

अमन साहू के मारे जाने के बाद राहुल सिंह ने संभाली कमान

राहुल सिंह का आपराधिक सफर पहले अमन साहू गिरोह से जुड़ने के साथ शुरू हुआ था। मार्च 2025 में पुलिस मुठभेड़ में अमन साहू की मौत के बाद राहुल सिंह ने गिरोह की कमान संभालने का दावा किया। इसके बाद कोयलांचल और औद्योगिक इलाकों में रंगदारी का नेटवर्क फैलाने की कोशिशें तेज हुईं।

रांची, रामगढ़, पलामू, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और लातेहार में उसके गिरोह की गतिविधियां सामने आ चुकी हैं। कारोबारियों और ठेकेदारों को धमकाने के अलावा निर्माण स्थलों पर गोलीबारी की घटनाओं में भी इस गिरोह का नाम आया है।

होटल पर फायरिंग के बाद चर्चा में आया राहुल दुबे गैंग

राहुल दुबे का गिरोह भी हाल के दिनों में कई आपराधिक घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है। हजारीबाग और रांची में फायरिंग की घटनाओं में इसकी संलिप्तता सामने आई है। 29 अक्टूबर की रात हजारीबाग के मटवारी स्थित एके इंटरनेशनल होटल पर गोलीबारी हुई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर राहुल दुबे के नाम से घटना की जिम्मेदारी लेने और होटल संचालक को धमकी देने वाली पोस्ट सामने आई।

इस मामले में रांची पुलिस ने 30 अक्टूबर को मुठभेड़ के बाद गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया। इसके बाद हथियारों की आपूर्ति करने के आरोप में जियाउल हबीब को भी पकड़ा गया। हालांकि, इन गिरफ्तारियों के बावजूद गिरोह के पूरे नेटवर्क को खत्म करना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।

गिरफ्तार गुर्गों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल की तैयारी

आईजी अभियान नरेंद्र सिंह के मुताबिक, दोनों गिरोहों के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षकों को ऐसे मामलों की पहचान कर स्पीडी ट्रायल कराने का निर्देश दिया जाएगा, ताकि गिरफ्तार अपराधियों को जल्द सजा दिलाई जा सके।

उन्होंने रंगदारी और धमकी का सामना कर रहे कारोबारियों तथा ठेकेदारों से अपील की है कि वे बिना डर के गोपनीय तरीके से पुलिस को सूचना दें। शिकायत मिलने पर संबंधित लोगों की सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सरगना तक पहुंचने से बड़ी चुनौती पूरा नेटवर्क तोड़ना

पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ राहुल सिंह और राहुल दुबे तक पहुंचने की नहीं, बल्कि उनके स्थानीय सहयोगियों, हथियार सप्लायरों और रंगदारी वसूली के तंत्र को खत्म करने की भी है। सोशल मीडिया के जरिए गिरोह की गतिविधियों का प्रचार अपराधियों को अपना प्रभाव बनाए रखने में मदद करता है। ऐसे में आर्थिक स्रोतों और स्थानीय नेटवर्क पर प्रहार किए बिना संगठित अपराध पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल होगा।

अमन साहू, अमन सिंह और सुजीत सिन्हा के बाद नए अपराधी गिरोहों का उभार झारखंड की कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना होगा कि रेड कॉर्नर नोटिस और लगातार पुलिस कार्रवाई के जरिए ‘दो आर’ के नेटवर्क को कितना कमजोर किया जा सकता है।

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