14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी सुमन सौरव उर्फ सौरव सुमन की जमानत याचिका खारिज कर दी। सुनवाई में सरकारी पक्ष ने OMR शीट की विसंगतियों, डिजिटल रिकॉर्ड, संदिग्ध बैंक लेन-देन और व्हाट्सऐप चैट को अहम साक्ष्य बताया।

अभियोजन के अनुसार, आरोपी की OMR शीट की कार्बन कॉपी और मूल प्रति में गंभीर अंतर मिले हैं। जांच एजेंसियों ने AWS डेटा, वित्तीय लेन-देन और व्हाट्सऐप संदेशों का विश्लेषण किया, जिनसे परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर और साजिश की आशंका मजबूत होती है।
सरकार ने अदालत को बताया कि आरोपी के पिता के खाते से कथित बिचौलिए पवन कुमार सिंह के खाते में करीब 15.90 लाख रुपये भेजे गए थे। अभियोजन ने इसे धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों की गंभीर कड़ी बताया। सरकार के मुताबिक, व्यापक गड़बड़ियों के कारण 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी।
बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
आरोपी के वकील ने कहा कि आरोप ठोस साक्ष्यों से साबित नहीं हुए हैं और बैंक लेन-देन आरोपी की प्रत्यक्ष भूमिका का निर्णायक प्रमाण नहीं है। व्हाट्सऐप चैट के बारे में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि किसी बातचीत का रिकॉर्ड मिलना यह साबित नहीं करता कि उसका संचालन आरोपी ही कर रहा था।
वकील ने यह भी बताया कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह कई महीनों से न्यायिक हिरासत में है। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी को फिलहाल राहत नहीं मिल सकी।






