उस्मानिया विश्वविद्यालय के कैंपस में ‘भारत में लोकतंत्र की स्थिति’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। सिटीजंस फॉर डेमोक्रेसी, सेंटर फॉर सोशल डायलॉग और लोहिया विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं और युवा शोधकर्ताओं ने लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक अधिकारों तथा संवैधानिक मूल्यों से जुड़ी चुनौतियों पर विचार रखे।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और सिटीजंस फॉर डेमोक्रेसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. शशि शेखर सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले युवाओं को पुलिस कार्रवाई और न्यायिक हिरासत का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यौन उत्पीड़न के आरोपियों के साथ कई बार सम्मानजनक व्यवहार किया जाता है। प्रो. सिंह ने सरकार को जवाबदेह बनाने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।

कार्यक्रम में लोहिया विचार मंच के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त सिविल जज टी. गोपाल सिंह के अलावा ब्यांशु गुप्ता (आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी, देहरादून) और वी. धरनी कृष्णा (एलायंस यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु) ने भी विचार साझा किए।
संगोष्ठी की अध्यक्षता सेंटर फॉर सोशल डायलॉग के संयोजक और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. रघु कुमार ने की। वक्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान के मूल्यों की रक्षा को आवश्यक बताया।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट






