दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के लिए तय स्थानों की सूची से जंतर-मंतर का नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। गृह मंत्रालय के निर्देशों और सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड को नए विकल्प के रूप में निर्धारित किया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नाराजगी जताते हुए सरकार पर निशाना साधा है।

प्रशासन के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने इसे तानाशाही मानसिकता से जोड़कर आलोचना की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का औपचारिक कदम उठाया गया है, जबकि उनके मुताबिक यह जगह पहले ही एक तानाशाह के कारण युद्ध के मैदान में बदल चुकी थी।
दीपके की यह टिप्पणी सरकार के फैसले के खिलाफ उनके विरोध को दर्शाती है। उन्होंने इस कदम को लोकतांत्रिक विरोध की आवाज सीमित करने की कोशिश के तौर पर पेश किया।
‘पूरा देश बनेगा जंतर-मंतर’
CJP प्रमुख ने संकेत दिया कि प्रदर्शन के लिए किसी एक स्थान पर पाबंदी लगाने से विरोध की राजनीति खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि असहमति की आवाज को सीमित नहीं किया जा सकता और अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।
उनके इस बयान से साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने की तैयारी में है।
सुरक्षा बनाम विरोध के अधिकार पर बहस
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थलों में बदलाव के पीछे सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को आधार बताया है। वहीं, इस फैसले की आलोचना करने वाले इसे विरोध दर्ज कराने के अधिकार से जोड़ रहे हैं।
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न आंदोलनों के प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में इसके नाम को निर्धारित स्थलों की सूची से हटाने का फैसला आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है। हालांकि, नए निर्देशों के दायरे और उनके लागू होने की विस्तृत स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।






