Wednesday, October 7, 2026
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पेट्रोलियम निर्यात पर सरकार का बड़ा फैसला, डीजल पर विंडफॉल टैक्स घटा; घरेलू कीमतों पर नहीं पड़ेगा असर

by उर्वशी शेखर
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केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए शुल्क में संशोधन करते हुए डीजल के मामले में टैक्स का बोझ कम कर दिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचनाओं के मुताबिक नई दरें 16 सितंबर 2026 से अगले 15 दिनों तक प्रभावी रहेंगी। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा के बाद किया गया है।

संशोधित व्यवस्था में डीजल निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को ₹24 से घटाकर ₹20 प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) को ₹1 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इस तरह डीजल के निर्यात पर कुल शुल्क ₹25 प्रति लीटर से घटकर ₹20 प्रति लीटर रह गया है।

हर पखवाड़े बदल सकती हैं दरें

पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू शुल्क की दरों की सरकार नियमित रूप से समीक्षा करती है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की औसत कीमतों को आधार बनाया जाता है। मौजूदा निर्यात शुल्क व्यवस्था 27 मार्च 2026 से लागू की गई थी।

सरकार ने पश्चिम एशिया में बने तनावपूर्ण हालात के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से इन शुल्कों को लागू किया था।

रिफाइनरियों और निर्यातकों को टैक्स राहत

डीजल पर निर्यात शुल्क में कमी का सीधा फायदा उन भारतीय रिफाइनरियों और कंपनियों को मिल सकता है, जो पेट्रोलियम उत्पादों को विदेशी बाजारों में भेजती हैं। शुल्क घटने से निर्यात की लागत कम होने की संभावना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, निर्यातकों की वास्तविक कमाई पर इसका प्रभाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा। इनमें वैश्विक ईंधन कीमतें, रिफाइनिंग मार्जिन और विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों की कुल मात्रा प्रमुख हैं।

घरेलू ग्राहकों के लिए पेट्रोल-डीजल पर कोई नया बदलाव नहीं

सरकार के इस फैसले का घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर तत्काल कोई सीधा असर नहीं पड़ा है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू मौजूदा उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यानी, निर्यात शुल्क में कटौती को घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। मौजूदा निर्णय मुख्य रूप से विदेशों को भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू शुल्क में बदलाव तक सीमित है।

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