झारखंड के बहुचर्चित बोकारो ट्रेजरी घोटाले की जांच में सीआईडी को आरोपी होमगार्ड जवान सतीश कुमार के खिलाफ अहम वित्तीय साक्ष्य मिले हैं। जांच के अनुसार, सरकारी खजाने से अवैध रूप से निकाली गई करोड़ों रुपये की रकम में से 1.08 करोड़ रुपये से अधिक राशि सतीश के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी। उस पर गबन की रकम का 10 प्रतिशत कमीशन के तौर पर अपने पास रखने का भी आरोप है। मामला सीआईडी थाना कांड संख्या 06/2026 से संबंधित है।

सीआईडी की प्राथमिकी और अब तक की जांच में सामने आया है कि बोकारो ट्रेजरी से पुलिस सब-इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के वेतन मद में अनियमित तरीके से 3.15 करोड़ रुपये निकाले गए। यह अवैध निकासी मई 2024 से मार्च 2026 के बीच की गई। जांच में रकम के लेन-देन की कड़ियां जोड़ते हुए एजेंसी ने पाया कि सरकारी खाते से निकाली गई राशि पहले अन्नू पांडे के बैंक खाते में पहुंची। इसके बाद यह पैसा बोकारो एसपी कार्यालय में अकाउंटेंट के पद पर तैनात कौशल कुमार पांडे तक पहुंचा।
निजी खाते में ट्रांसफर हुई सरकारी धन की बड़ी रकम
जांच के दौरान होमगार्ड सतीश कुमार की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई। वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों के मुताबिक, कथित गबन की राशि में से 1.08 करोड़ रुपये से अधिक उसके निजी बैंक खाते में जमा किए गए थे। सीआईडी इस लेन-देन को सरकारी धन की अवैध निकासी और उसके हस्तांतरण से जुड़े नेटवर्क की अहम कड़ी मान रही है।
जांच एजेंसी के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, सतीश पर केवल रकम प्राप्त करने ही नहीं, बल्कि कथित तौर पर सरकारी धन को निकालकर मुख्य आरोपी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का भी आरोप है। सीआईडी को ऐसे प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर आशंका जताई गई है कि उसने इस अवैध लेन-देन में अपनी भूमिका के बदले गबन की गई राशि का 10 प्रतिशत कमीशन के रूप में अपने पास रखा। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
कई आरोपी जेल में, सीआईडी की जांच जारी
बोकारो ट्रेजरी घोटाले में सीआईडी की जांच अभी जारी है। एजेंसी अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। कुछ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और आरोपियों के बीच कथित संपर्कों की पड़ताल कर रही है।
मामले में सामने आए नए वित्तीय साक्ष्यों के बाद जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है। सीआईडी की आगे की पड़ताल से सरकारी धन की अवैध निकासी में शामिल अन्य लोगों और रकम के इस्तेमाल से संबंधित अतिरिक्त जानकारियां सामने आने की संभावना है।









