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20 साल की सेवा के बाद भी 1996 बैच के ASI को कम वेतन, 2005 बैच के कर्मियों को ज्यादा ग्रेड पे

by उर्वशी शेखर
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झारखंड पुलिस में प्रोन्नति के बाद वेतन निर्धारण को लेकर गंभीर विसंगति सामने आई है। करीब 20 साल की सेवा के बाद सहायक अवर निरीक्षक (ASI) बने 1996 बैच के पुलिसकर्मियों को 2800 रुपये ग्रेड पे मिल रहा है, जबकि उनसे नौ साल जूनियर 2005 बैच के पुलिसकर्मी 4200 रुपये ग्रेड पे प्राप्त कर रहे हैं। एक ही पद पर तैनात होने के बावजूद वेतन में इस अंतर से प्रभावित कर्मियों में नाराजगी बढ़ रही है।

इस विसंगति से मुख्य रूप से 1 सितंबर 1996 से 6 अक्टूबर 1996 के बीच नियुक्त आरक्षी प्रभावित हैं। करीब दो दशक की सेवा के बाद इनकी ASI पद पर प्रोन्नति हुई थी। इस बैच के लगभग 3300 पुलिसकर्मियों को प्रोन्नति मिली थी। दूसरी ओर, वर्ष 2005 में नियुक्त करीब 2800 आरक्षियों को 19 साल की सेवा पूरी होने से पहले ही ASI बनने का अवसर मिला और उन्हें 4200 रुपये का ग्रेड पे निर्धारित किया गया।

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जूनियर पुलिसकर्मियों का वेतन सीनियर से अधिक

वेतन में इस अंतर का सबसे बड़ा कारण प्रोन्नति और वेतन निर्धारण से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था को माना जा रहा है। प्रभावित पुलिसकर्मियों का कहना है कि वरिष्ठता और लंबे सेवाकाल के बावजूद उन्हें अपने कनिष्ठ सहकर्मियों से कम वेतन मिल रहा है। एक ही पद और समान जिम्मेदारियों के बावजूद ग्रेड पे में 1400 रुपये का अंतर बना हुआ है।

पुलिसकर्मियों के अनुसार, वर्षों तक विभाग में सेवा देने के बाद भी उन्हें आर्थिक लाभ के बजाय नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस स्थिति ने पुलिस विभाग के भीतर असंतोष पैदा कर दिया है। प्रभावित कर्मियों का मानना है कि वेतन निर्धारण की इस व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, ताकि वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारियों के बीच पैदा हुआ अंतर खत्म हो सके।

पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ पर भी पड़ेगा असर

पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस मामले को आर्थिक नुकसान के साथ कर्मचारियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है। एसोसिएशन ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के समक्ष वेतन विसंगति दूर करने की मांग रखी है।

प्रभावित पुलिसकर्मियों की चिंता सिर्फ मौजूदा वेतन तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि ग्रेड पे और वेतनमान में अंतर का असर भविष्य में मिलने वाली पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ और अन्य वित्तीय सुविधाओं पर भी पड़ सकता है। ऐसे में वेतन विसंगति का जल्द समाधान नहीं होने पर रिटायरमेंट के समय भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पुलिसकर्मियों ने सरकार और विभागीय अधिकारियों से पूरे मामले की समीक्षा कर उचित वेतन निर्धारण करने की मांग की है।

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