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झारखंड HC ने अपर बाजार में दुकानों की लीज रद्द करने का आदेश निरस्त किया, आठ याचिकाकर्ताओं को राहत

by उर्वशी शेखर
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अपर बाजार के जालान रोड स्थित जमीन और दुकानों की लीज समाप्त करने के रांची नगर निगम के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट ने गलत ठहराया है. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने किरण देवी मोदी समेत आठ याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए निगम के आदेशों को निरस्त कर दिया. अदालत ने माना कि लीज रद्द करने के लिए नगर निगम की ओर से पर्याप्त आधार और ठोस कारण प्रस्तुत नहीं किए गए थे.

हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले का अंतिम निपटारा करने के बजाय नगर निगम को नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा है कि सभी संबंधित पक्षों के दस्तावेजों और दलीलों की समीक्षा के बाद 12 सप्ताह के भीतर स्पष्ट कारणों के साथ नया आदेश जारी किया जाए. तब तक याचिकाकर्ताओं के मौजूदा कब्जे को प्रभावित नहीं किया जाएगा.

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1966-67 में हुआ था जमीन का आवंटन

मामले की शुरुआत वर्ष 1966-67 से होती है. उस समय तत्कालीन नगरपालिका ने टेंट हाउस का कारोबार संचालित करने के लिए मोहन लाल कतची को जालान रोड स्थित भूखंड आवंटित किया था. बाद के वर्षों में कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से संपत्ति मोदी परिवार के पास पहुंची. वर्ष 2004 में नगर निगम की स्वीकृति मिलने के बाद भूखंड पर पक्के निर्माण कराए गए. इसके बाद वहां बनी दुकानों को अन्य याचिकाकर्ताओं के नाम आवंटित करने का अनुरोध किया गया.

विवाद ने वर्ष 2014 में उस समय तूल पकड़ा, जब रांची नगर निगम ने लीज की शर्तों के उल्लंघन और संपत्ति को सब-लेट करने का आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया. इसके बाद निगम ने लीज समाप्त करने और दुकानों को खाली कराने का आदेश दे दिया. प्रभावित पक्षों ने निगम की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

तीन पंक्तियों के आदेश पर अदालत ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई. अदालत ने पाया कि लीज रद्द करने से संबंधित आदेश महज तीन पंक्तियों में जारी किए गए थे. इनमें संबंधित पक्षों के जवाब, उपलब्ध दस्तावेजों और उनके पक्ष को उचित तरीके से परखने का कोई स्पष्ट आधार नहीं दिखा.

अदालत ने इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना और निगम के सभी विवादित आदेशों को रद्द कर दिया. साथ ही निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारियों को मामले के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए नया और तर्कसंगत निर्णय लेना होगा.

हाईकोर्ट के इस फैसले से आठों याचिकाकर्ताओं को फिलहाल बड़ी राहत मिली है. नए सिरे से निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी होने तक दुकानों और भूखंड पर उनका कब्जा सुरक्षित रहेगा।

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