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झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने राज्य के विभिन्न जिलों और पुलिस वाहिनियों में कार्यरत कनीय पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों से जुड़े प्रशासनिक मामलों को लेकर चिंता जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि कल्याणकारी व्यवस्थाओं की अनदेखी, प्रशासनिक फैसलों में अस्पष्टता और लंबे समय तक लंबित मामलों के कारण पुलिसकर्मियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। संगठन ने संकेत दिया है कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो पूरे मामले को पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा के जरिए मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
प्रदेश संयुक्त सचिव-सह-कोषाध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि पुलिस जैसे अनुशासित संगठन की प्रभावशीलता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि उसके जवानों के मनोबल और उनके साथ होने वाले निष्पक्ष व्यवहार से भी तय होती है। उनके मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में इन दोनों पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
SP और कमांडेंट की कार्यप्रणाली पर सवाल
एसोसिएशन ने कुछ जिलों और वाहिनियों में पुलिस अधीक्षकों तथा कमांडेंट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कर्मियों से जुड़े कल्याणकारी विषयों और प्रशासनिक पारदर्शिता को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है। संगठन के अनुसार इसका असर निचले स्तर के पुलिसकर्मियों के मानसिक तनाव और कार्य संतुष्टि पर पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने पुलिस मैनुअल में निर्धारित व्यवस्थाओं के पालन को लेकर भी सवाल उठाया। संगठन का दावा है कि कई स्थानों पर नियमित पुलिस मीटिंग और ‘लाइन डे’ के दौरान पुलिस केंद्र के निरीक्षण जैसी निर्धारित गतिविधियां अपेक्षित तरीके से नहीं हो रही हैं। इसके विपरीत, विभाग की मूल जिम्मेदारियों से इतर कार्यों को अधिक महत्व दिए जाने की शिकायत है।
विभागीय कार्रवाई से जुड़े मामलों में भी एसोसिएशन ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है। संगठन का कहना है कि नियमों में कार्रवाई और निलंबन से संबंधित समय-सीमा निर्धारित होने के बावजूद कुछ पुलिसकर्मियों के मामले छह से आठ महीने या उससे भी अधिक समय तक लंबित रहते हैं। एसोसिएशन के मुताबिक लंबे समय तक निलंबन और फाइलों के निस्तारण में देरी से संबंधित कर्मियों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है।

ट्रांसफर-पोस्टिंग और हथियार आवंटन पर भी सवाल
थानों, ओपी, पुलिस वाहिनियों और जिला कार्यालयों में स्थानांतरण एवं पदस्थापना को लेकर भी संगठन को शिकायतें मिली हैं। एसोसिएशन का आरोप है कि कई मामलों में स्पष्ट और समान नीति के अभाव में तबादले किए जा रहे हैं।
इसके अलावा अंगरक्षकों और एएसआई स्तर के अधिकारियों की सुरक्षा संबंधी तैनाती तथा हथियारों के आवंटन में निर्धारित नियमों के अनुपालन पर भी संगठन ने सवाल उठाया है। कनीय पुलिस अधिकारियों के साथ कथित तौर पर अनुचित भाषा के इस्तेमाल और दुर्व्यवहार को लेकर भी एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर की है।
शिकायत उठाने वालों को निशाना बनाने का आरोप
एसोसिएशन का कहना है कि जब संगठन के प्रतिनिधि प्रशासनिक खामियों की ओर अधिकारियों का ध्यान खींचते हैं, तो कई बार उनकी बात को सुधार की संभावना के तौर पर देखने के बजाय परेशानी पैदा करने वाली गतिविधि मान लिया जाता है। संगठन ने दावा किया कि ऐसे मामलों में एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों को ही निशाने पर लेने की कोशिश होती है।
एसोसिएशन ने पुलिसकर्मियों से अपील की है कि वे किसी भी दबाव में नियमों के विरुद्ध काम न करें। साथ ही थाना और ओपी प्रभारियों से आम लोगों के साथ पुलिस मैनुअल के नियम 5 के अनुरूप सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने को कहा गया है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि उसकी आपत्तियों का उद्देश्य किसी अधिकारी या व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना नहीं है। एसोसिएशन के मुताबिक उसका मुख्य लक्ष्य पुलिस बल की संस्थागत गरिमा बनाए रखना, प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और कनीय कर्मियों के वैधानिक एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।