जमशेदपुर के बहुचर्चित 730 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले में मुख्य आरोपी शिवकुमार देवड़ा को फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करना होगा। उनकी जमानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले में अपनी ओर से पक्ष रखा और कथित आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने पेश किया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में 90 से अधिक कथित फर्जी शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर फर्जी चालान तैयार किए गए। इन कंपनियों के माध्यम से लगभग 14,325 करोड़ रुपये के चालान बनाए जाने का आरोप है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 730 करोड़ रुपये से अधिक के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अनुचित लाभ लेने की बात सामने आई है। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने का आरोप है।
GST जांच से शुरू हुई कार्रवाई
इस कथित घोटाले का खुलासा होने के बाद शुरुआत में जीएसटी इंटेलिजेंस ने कार्रवाई शुरू की थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामले की जांच अपने हाथ में लेकर कथित वित्तीय लेनदेन और पूरे नेटवर्क की पड़ताल शुरू की। जांच के दायरे में शिवकुमार देवड़ा के अलावा कई अन्य कारोबारी भी आए हैं, जिनकी इस मामले में गिरफ्तारी हो चुकी है।
फिलहाल हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित होने के बाद शिवकुमार देवड़ा की कानूनी स्थिति पर अदालत के अगले आदेश का इंतजार है। वहीं, जांच एजेंसियां इस कथित फर्जीवाड़े से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।






