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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम में गड़बड़ी कर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की है। प्राधिकरण के मुताबिक, कुछ कर्मचारी कार्यस्थल पर मौजूद हुए बिना ही GPS स्पूफिंग और मॉक लोकेशन जैसे तकनीकी तरीकों से अपनी हाजिरी बना रहे थे। इस मामले में NHAI ने संबंधित कर्मचारियों के साथ-साथ उन्हें नियुक्त करने वाली कंसल्टिंग कंपनियों की जवाबदेही भी तय करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला NHAI के डेटा लेक 3.0 प्लेटफॉर्म पर संचालित अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम (AMS) से जुड़ा है। प्राधिकरण को जानकारी मिली कि अथॉरिटी इंजीनियर (AE) और इंडिपेंडेंट इंजीनियर (IE) के तौर पर काम करने वाली फर्मों के कुछ कर्मचारी वास्तविक कार्यस्थल पर पहुंचे बिना ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे।
इसके लिए कथित तौर पर थर्ड-पार्टी ऐप्स की मदद से GPS लोकेशन में हेरफेर किया जा रहा था। इस तरीके से ऐप में मौजूद जियोफेंसिंग और चेहरे की पहचान करने वाली सुरक्षा व्यवस्था को भी चकमा दिया जा रहा था। NHAI ने इसे अनुबंध की शर्तों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए मामले में सख्ती बरतने का फैसला किया है।
औचक जांच करेंगे क्षेत्रीय अधिकारी
फर्जी हाजिरी पर रोक लगाने के लिए NHAI ने क्षेत्रीय अधिकारियों (ROs) और परियोजना निदेशकों (PDs) को महत्वपूर्ण कर्मचारियों की कार्यस्थल पर वास्तविक मौजूदगी की अचानक जांच करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को मौके पर की गई जांच के नतीजों का मिलान अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम के डिजिटल रिकॉर्ड से करना होगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ऐप में दर्ज उपस्थिति और कर्मचारी की वास्तविक मौजूदगी के बीच कोई अंतर तो नहीं है। इससे डिजिटल हाजिरी में संभावित हेरफेर की पहचान करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
कंसल्टिंग फर्मों पर भी गिरेगी गाज
NHAI के निर्देशों के मुताबिक, डिजिटल अटेंडेंस में धोखाधड़ी के दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और संबंधित कंसल्टिंग फर्मों को कड़े परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ऐसी फर्मों और व्यक्तियों को काम से प्रतिबंधित करने के साथ उनकी परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
प्राधिकरण का यह कदम इस बात का संकेत है कि फर्जी उपस्थिति के मामलों में केवल संबंधित कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उनकी तैनाती करने वाली कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
BNS और IT एक्ट के तहत दर्ज हो सकते हैं मामले
निर्देशों में धोखाधड़ी के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318, 319 और 316 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 और 66D के तहत आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल किया गया है। हालांकि, इन धाराओं के तहत कार्रवाई संबंधित मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर होगी।
वहीं, अटेंडेंस सिस्टम की तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए NHAI ने डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन को भी पत्र की प्रति भेजी है। प्राधिकरण ने ऐप की सुरक्षा व्यवस्था को अपग्रेड करने और ऐसे तकनीकी उपाय लागू करने की जरूरत बताई है, जिससे GPS में हेरफेर कर या अन्य तरीकों से सिस्टम को बायपास करने की संभावना कम की जा सके।
NHAI की इस पहल का उद्देश्य डिजिटल उपस्थिति प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना, कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना और कार्यस्थल पर वास्तविक उपस्थिति को अनिवार्य रूप से दर्ज कराना है।






