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अदालत के चक्कर होंगे कम! अब घर बैठे मिलेगी फैसलों की कॉपी, झारखंड HC में जल्द शुरू होंगी 6 डिजिटल सेवाएं

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में न्यायिक सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में हाईकोर्ट बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब मुकदमों से जुड़े आदेश और फैसलों की प्रमाणित प्रतियां लेने के लिए वकीलों और पक्षकारों को हर बार अदालत नहीं जाना पड़ेगा। वे घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों को बोलकर आदेश तैयार करने और एआई की मदद से कानूनी शोध करने की सुविधा भी मिलेगी।

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हाईकोर्ट सोमवार, 2 नवंबर को ऐसी छह डिजिटल सेवाओं की शुरुआत करेगा। इनका मकसद न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ समय और संसाधनों की बचत करना है।

24 घंटे ऑनलाइन कर सकेंगे प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन

राज्य की सभी दीवानी अदालतों में न्यायिक आदेश, फैसले और अन्य दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था शुरू होगी। यह सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी। इससे अधिवक्ताओं और मुकदमे से जुड़े लोगों को आवेदन देने के लिए अदालत पहुंचने की जरूरत कम होगी।

इस व्यवस्था से अपील दाखिल करने वाले पक्षकारों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। कई बार प्रमाणित प्रति मिलने में देरी के कारण अपील की प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऑनलाइन आवेदन से दस्तावेज हासिल करने में लगने वाला समय घट सकता है। इससे अदालतों में कागजी काम और प्रशासनिक दबाव भी कम होने की संभावना है।

नई वेबसाइट और Apple यूजर्स के लिए ऐप

हाईकोर्ट की वेबसाइट को नए स्वरूप में तैयार किया गया है। इस पर केस की स्थिति, सुनवाई की सूची, दैनिक आदेश और फैसले आसानी से देखे जा सकेंगे। वेबसाइट का नेविगेशन भी सरल बनाया गया है, ताकि उपयोगकर्ताओं को जरूरी जानकारी तलाशने में परेशानी न हो।

वहीं, अब तक उपलब्ध एंड्रॉयड ऐप के साथ एप्पल डिवाइस इस्तेमाल करने वालों के लिए भी मोबाइल ऐप शुरू किया जाएगा। इसके जरिए केस स्टेटस, कॉज लिस्ट, आदेश और निर्णय देखने के अलावा ई-फाइलिंग, कोर्ट डिस्प्ले बोर्ड, ऑनलाइन कोर्ट फीस भुगतान और कोर्ट कैलेंडर जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

वकील मोबाइल पर सहेज सकेंगे अपनी कॉज लिस्ट

अधिवक्ताओं के लिए वाद सूची को व्यवस्थित करने की सुविधा भी दी जा रही है। वे अपने नाम या पंजीकरण संख्या के आधार पर कॉज लिस्ट खोज सकेंगे और उसे डिवाइस में सुरक्षित रख पाएंगे। कोर्ट नंबर के अनुसार मामलों को छांटने और सुनवाई पूरी होने पर उन्हें ‘पूर्ण’ चिह्नित करने का विकल्प भी होगा।

इस सुविधा में डार्क थीम और ऑफलाइन इस्तेमाल की व्यवस्था शामिल है। वकील अधिकतम 10 कॉज लिस्ट अपने डिवाइस में सेव कर सकेंगे। इंटरनेट उपलब्ध नहीं होने पर भी पहले से सुरक्षित जानकारी देखी जा सकेगी। इससे छपी हुई सूची पर निर्भरता घटेगी और सुनवाई की तैयारी आसान होगी।

स्पीच रिकग्निशन से बोलकर तैयार होंगे न्यायिक दस्तावेज

न्यायिक अधिकारियों को ड्रैगन स्पीच रिकग्निशन सॉफ्टवेयर किट उपलब्ध कराए गए हैं। इसके माध्यम से वे बोलकर आदेश, निर्णय और अन्य न्यायिक दस्तावेज तैयार कर सकेंगे। इससे टाइपिंग में लगने वाला समय और मेहनत कम करने में मदद मिलेगी।

कानूनी शोध में एआई टूल की मिलेगी मदद

हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के लिए ‘सुप्रीम टुडे’ का एआई संस्करण भी उपलब्ध कराया है। यह प्लेटफॉर्म कानूनी शोध, न्यायिक नजीरों की खोज और संबंधित फैसलों तक पहुंच बनाने में मदद करेगा। इसके साथ ही कानूनी दस्तावेजों की ड्राफ्टिंग में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा।

इन छह पहलों के जरिए हाईकोर्ट का लक्ष्य न्यायिक सेवाओं को अधिक सुलभ और तकनीक आधारित बनाना है। ऑनलाइन दस्तावेज आवेदन से लेकर एआई आधारित कानूनी शोध तक की सुविधाएं लागू होने के बाद वकीलों, पक्षकारों और न्यायिक अधिकारियों के रोजमर्रा के कामकाज में बदलाव आने की उम्मीद है।

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