धनबाद के गोविंदपुर प्रखंड की नागरकियारी ग्राम पंचायत में एक विकास योजना को लेकर सरकारी रिकॉर्ड और जमीन पर नजर आने वाली स्थिति के बीच कथित अंतर का मामला सामने आया है। मेरी पंचायत और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर 15वें वित्त आयोग से संबंधित पेवर ब्लॉक सड़क निर्माण योजना की तस्वीरों और दर्ज खर्च को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। राजू महतो की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, योजना की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र जांच की जरूरत है।
सरकारी पोर्टल पर दर्ज विवरण के मुताबिक, भिखू महतो के घर से आलमउद्दीन अंसारी के घर तक पेवर ब्लॉक पथ निर्माण के लिए वर्क आईडी 128509451 जारी की गई है। योजना का पंजीकरण 15 जून 2026 को हुआ था। इसके लिए 2,49,900 रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया, जबकि पोर्टल पर अब तक 2,43,173 रुपये खर्च दर्ज हैं। योजना को 15वें वित्त आयोग के तहत संचालित बताया गया है।
तस्वीरों और स्थल की स्थिति को लेकर संदेह
मामले में मुख्य सवाल पोर्टल पर उपलब्ध तस्वीरों को लेकर उठ रहा है। तस्वीरों को देखकर यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि उन्हें इसी योजना के तहत हाल में निर्मित पेवर ब्लॉक सड़क की स्थिति दर्शाने के लिए अपलोड किया गया है या नहीं। उपलब्ध दृश्य एक पहले से बनी सड़क जैसे प्रतीत होते हैं। हालांकि, केवल तस्वीरों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि काम नया है या पहले से मौजूद सड़क पर ही योजना दर्ज की गई है।

इसी वजह से स्थानीय स्तर पर योजना की वास्तविकता और खर्च की जांच की मांग उठ रही है। ग्रामीणों और जागरूक लोगों का कहना है कि स्वीकृत योजना, मौके पर किए गए निर्माण और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कराया जाना चाहिए।
किन बिंदुओं की जांच की जरूरत?
पूरे मामले में यह सत्यापित किया जाना जरूरी बताया जा रहा है कि जिस स्थान को योजना का कार्यस्थल बताया गया है, वहां वास्तव में नया पेवर ब्लॉक पथ बनाया गया है या नहीं। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता और मात्रा का मिलान स्वीकृत प्राक्कलन, बीओक्यू तथा लागू सरकारी दरों से किया जा सकता है।
इसके अलावा पोर्टल पर अपलोड की गई मूल तस्वीरों के जीपीएस लोकेशन की भी जांच किए जाने की जरूरत है, ताकि यह पुष्टि हो सके कि तस्वीरें वास्तविक कार्यस्थल की ही हैं। योजना से जुड़े मेजरमेंट बुक, भुगतान वाउचर और पूरी भुगतान प्रक्रिया की जांच से भी यह स्पष्ट हो सकता है कि दर्ज खर्च और वास्तविक कार्य के बीच कोई अंतर है या नहीं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर योजना में अनियमितता का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज राशि और तस्वीरों से सामने आ रही स्थिति के बीच उठे सवालों को देखते हुए संबंधित विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।