झारखंड हाईकोर्ट ने संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों के हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों को राहत देते हुए राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को नियुक्ति का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर सफल उम्मीदवारों की उम्मीदवारी स्वीकार कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।

मामला वर्ष 2015 की शिक्षक नियुक्ति नियमावली से जुड़ा है। इसके तहत संबंधित विषयों में पीजी या आचार्य की डिग्री अनिवार्य थी। हालांकि, योग्यता को लेकर असमंजस दूर करने के लिए सरकार ने 11 और 13 जनवरी 2017 को आदेश जारी कर निर्धारित न्यूनतम अंकों के साथ स्नातक डिग्रीधारियों को भी पात्र माना था। इसके बाद JSSC ने संशोधित विज्ञापन जारी किया, जिसके आधार पर अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कर काउंसलिंग तक का सफर तय किया।
लेकिन जून 2023 में पीजी की डिग्री नहीं होने के आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई। विनोद कुमार सिंह सहित अन्य अभ्यर्थियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जब सरकार ने स्वयं स्नातक डिग्री को मान्य कर आयोग से संशोधित विज्ञापन जारी कराया था, तो चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में अभ्यर्थियों को बाहर करना मनमाना और अनुचित है। कोर्ट के इस फैसले से लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे सफल उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है।






