झारखंड में करीब एक दशक बाद आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट)-2026 में शामिल होने पहुंचे अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर सामने आई एक पोस्ट के मुताबिक, ट्रेन के निर्धारित समय से करीब पांच घंटे देर से पहुंचने के कारण 1000 से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। रविवार, 1 नवंबर को हुई परीक्षा के बाद इस दावे ने रेलवे की समयबद्धता और दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों के आवंटन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला ट्रेन संख्या 18182 से जुड़ा है, जो जसीडीह से टाटानगर के बीच चलती है। एक अभ्यर्थी की सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, ट्रेन को सुबह सात बजे पहुंचना था, लेकिन वह करीब पांच घंटे की देरी से पहुंची। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस देरी के कारण वे निर्धारित समय पर अपने परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंच सके और उन्हें परीक्षा देने का मौका गंवाना पड़ा।
तीन जिलों का विकल्प, फिर भी दूर आवंटित हुए परीक्षा केंद्र
अभ्यर्थियों की परेशानी की एक बड़ी वजह परीक्षा केंद्रों की दूरी भी बताई जा रही है। सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि केंद्र आवंटन के दौरान तीन जिलों का विकल्प देने के बावजूद कुछ अभ्यर्थियों को अपने गृह जिले से करीब 10 जिलों की दूरी पर परीक्षा केंद्र मिले। इतनी दूर स्थित केंद्रों तक पहुंचने के लिए उन्हें रेल यात्रा पर निर्भर रहना पड़ा।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, ट्रेन के समय पर नहीं पहुंचने से उनकी पूरी यात्रा योजना प्रभावित हुई। परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचना संभव नहीं होने के कारण कई परीक्षार्थियों को परीक्षा से वंचित रहना पड़ा। हालांकि, कितने अभ्यर्थियों की परीक्षा वास्तव में छूटी, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
रेलवे और परीक्षा केंद्र आवंटन की व्यवस्था पर सवाल
परीक्षा छूटने के दावे के बाद अभ्यर्थियों ने रेलवे की कार्यप्रणाली के साथ परीक्षा केंद्र आवंटन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि परीक्षा की तारीख पहले से तय होने के बावजूद दूर के केंद्रों तक पहुंचने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि झारखंड में जेटेट का आयोजन लंबे अंतराल के बाद हुआ। ऐसे में परीक्षा छूटने से उनकी तैयारी और आगे की संभावनाओं पर असर पड़ने की चिंता है। वे जानना चाहते हैं कि ट्रेन की देरी जैसी परिस्थितियों में प्रभावित परीक्षार्थियों की परेशानी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल, 1000 से अधिक अभ्यर्थियों के परीक्षा से वंचित रहने का आंकड़ा सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। ट्रेन की देरी से प्रभावित परीक्षार्थियों की वास्तविक संख्या और इस मामले में रेलवे या परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।









