आजसू बुद्धिजीवी मंच की ओर से रविवार को सिल्ली के विलेज रिजॉर्ट में झारखंड की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें झारखंड आंदोलनकारियों और बुद्धिजीवियों ने राज्य की राजनीति, स्थानीय अधिकारों, रोजगार, विस्थापन और संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर विचार रखे।

मुख्य अतिथि डोमन सिंह मुंडा ने कहा कि आदिवासी, मूलवासी और अन्य स्थानीय समुदायों की पहचान एवं अधिकारों की रक्षा जरूरी है। उन्होंने भूमि, स्थानीयता, भाषा-संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की जरूरत बताई।
डॉ. मुकुंद चंद्र मेहता ने राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी अपेक्षित विकास नहीं होने पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। वहीं, डॉ. संजय बसु मल्लिक ने झारखंड की राजनीति, अर्थव्यवस्था और मीडिया में बाहरी प्रभाव बढ़ने पर चिंता जताते हुए स्थानीय हितों की रक्षा के लिए बौद्धिक जागरूकता पर जोर दिया।

आजसू के केंद्रीय प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने झारखंड आंदोलन के संघर्ष और बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के संसाधनों और अधिकारों पर स्थानीय लोगों की प्राथमिकता सुनिश्चित होनी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय चंद्र महतो ने की। इसमें शिक्षा, रोजगार, आर्थिक विकास और झारखंड की अस्मिता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। संचालन नंदकिशोर महतो ने किया। परिचर्चा में विभिन्न प्रखंडों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी शामिल हुए।









