कोलकाता में सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से कथित तौर पर लाखों रुपये वसूलने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान सागरडेगी निवासी तरुण दास के रूप में हुई है। कार्रवाई कोलकाता आर्मी इंटेलिजेंस और कोलकाता पुलिस के संयुक्त प्रयास से की गई।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, तरुण खुद को सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। वह कथित तौर पर मिलिट्री इंटेलिजेंस का लेफ्टिनेंट कर्नल और पैरा कमांडो होने का दावा करता था। सेना की वर्दी पहनकर वह अपनी फर्जी पहचान को विश्वसनीय बनाने की कोशिश करता था।
फर्जी ज्वाइनिंग लेटर से खुला मामला
आरोप है कि तरुण ने एक युवक को सेना में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उससे पैसे लिए और बाद में उसे फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भी सौंप दिया। युवक जब पत्र में दिए गए पते पर पहुंचा, तब उसे दस्तावेज के फर्जी होने का पता चला। इसके बाद मामले की जानकारी सेना की इंटेलिजेंस यूनिट तक पहुंची।
इनपुट मिलने के बाद पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस ने आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। इसी दौरान मुर्शिदाबाद के एक चेकपोस्ट पर जांच के दौरान तरुण को पकड़ लिया गया।
घर से बाहर निकलते ही पहन लेता था वर्दी
जांच में सामने आया है कि आरोपी अपनी कथित पहचान को मजबूत करने के लिए घर से निकलते समय सेना की वर्दी पहनता था। इसके जरिए वह आम लोगों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के बीच खुद को वास्तविक सैन्य अधिकारी के तौर पर पेश करता था।
गिरफ्तारी के बाद उसके कब्जे से सेना से जुड़े फर्जी दस्तावेज, नकली पहचान पत्र, मार्कशीट, फर्जी सील-मुहर और वॉकी-टॉकी समेत कई सामान बरामद किए गए हैं। इसके अलावा सोने के आभूषण और एक कार भी मिलने की बात सामने आई है। बरामद सामग्री की जांच की जा रही है।
नेटवर्क और पीड़ितों की तलाश में जुटी एजेंसियां
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि तरुण ने इस कथित फर्जीवाड़े को कब से संचालित किया और उसके संपर्क में कितने लोग थे। खास तौर पर यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि सेना में नौकरी के नाम पर उसने कितने युवाओं से रकम ली।
पूछताछ के जरिए उसके संभावित नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले लोगों और अब तक सामने नहीं आए पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस कथित भर्ती ठगी के पूरे दायरे का खुलासा होने की उम्मीद है।






