हजारीबाग: एनएच-33 के चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान में कथित अनियमितता के करीब आठ साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेरू निवासी बालेश्वर प्रसाद (69) और कटकमदाग थाना क्षेत्र के रामनगर निवासी प्रवीण कुमार सिन्हा (63) के रूप में हुई है।
एसीबी के मुताबिक, दोनों आरोपी उस समय संबंधित विभागों में अहम पदों पर तैनात थे। बालेश्वर प्रसाद मांडू अंचल, रामगढ़ में अमीन के पद पर कार्यरत थे, जबकि प्रवीण कुमार सिन्हा जिला भू-अर्जन कार्यालय, रामगढ़ में प्रधान सहायक के पद पर पदस्थापित थे।
1.92 एकड़ जमीन के मुआवजे से जुड़ा मामला
जांच का केंद्र रामगढ़ जिले के मांडू अंचल के जोड़ाकरम मौजा की जमीन है। खाता नंबर 126 के प्लॉट नंबर 2677 की 1.92 एकड़ भूमि एनएच-33 के विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई थी। इस जमीन के बदले पंचाट संख्या-02 के तहत किए गए मुआवजा भुगतान में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे थे।
इसी मामले में हजारीबाग थाना कांड संख्या 13/2018 के तहत 18 सितंबर 2018 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। केस में तत्कालीन सहायक, प्रधान सहायक, अमीन और कानूनगो सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।

कई धाराओं में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
एसीबी ने मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी और 406 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की थी। लंबे समय से चल रही जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों के आधार पर अब दो आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
एसीबी ने 1 अक्टूबर 2026 को बालेश्वर प्रसाद और प्रवीण कुमार सिन्हा को गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
आठ साल पुराने इस प्रकरण में हुई ताजा गिरफ्तारी से एनएच-33 परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजा भुगतान में कथित अनियमितताओं की जांच फिर सुर्खियों में आ गई है।