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झारखंड के जंगलों, झरनों और वन्यजीव क्षेत्रों को पर्यटन के बड़े केंद्रों के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए झारखंड इकोटूरिज्म अथॉरिटी (JETA) के तहत एक विशेष प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) गठित करने की योजना बनाई गई है। यह इकाई राज्य में इकोटूरिज्म परियोजनाओं की योजना बनाने से लेकर उनके क्रियान्वयन, निवेश और प्रचार-प्रसार तक की जिम्मेदारी संभालेगी। इसके जरिए पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी तैयार किए जाएंगे।
प्रस्तावित PMU का मुख्य काम इकोटूरिज्म से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं और परिसंपत्तियों का विकास करना होगा। इसके अलावा नई पर्यटन सेवाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा और निजी निवेश आकर्षित करने की पहल होगी।
झारखंड के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी काम किया जाएगा। साथ ही इकोटूरिज्म सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने की जिम्मेदारी भी इस इकाई को दी जाएगी। पर्यटन गतिविधियों से ग्रामीण समुदायों को जोड़कर स्थायी रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना भी योजना का अहम हिस्सा है।
मास्टर प्लान से लेकर PPP परियोजनाओं तक जिम्मेदारी
PMU पर्यटन स्थलों के विकास के लिए मास्टर प्लान और परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करेगी। दूसरी एजेंसियों और सलाहकारों की ओर से तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की समीक्षा भी इसी इकाई के जिम्मे होगी।
इसके अलावा निविदा प्रक्रिया से जुड़े EOI, RFQ और RFP दस्तावेज तैयार करने, उनकी कानूनी जांच और अनुबंध प्रबंधन में सहयोग दिया जाएगा। केंद्र सरकार और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं से मिलने वाले अनुदान के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार करने में भी टीम मदद करेगी।
चुनिंदा पर्यटन स्थलों पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत परियोजनाएं विकसित करने की योजना है। PMU इन परियोजनाओं की परिकल्पना से लेकर उन्हें आगे बढ़ाने तक तकनीकी और प्रबंधन संबंधी सहयोग देगी।
विशेषज्ञों की टीम संभालेगी अलग-अलग जिम्मेदारियां
प्रस्तावित इकाई में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। टीम लीडर पूरी व्यवस्था का संचालन करेंगे। वे मास्टर प्लान तैयार कराने, नीतिगत सलाह देने और अनुबंधों की निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगे।
प्रोजेक्ट आर्किटेक्ट पर्यटन स्थलों का निरीक्षण कर बुनियादी ढांचे की जरूरतों का आकलन करेंगे और निर्माण से जुड़े डिजाइन तैयार करेंगे। वहीं, प्रोक्योरमेंट एक्सपर्ट खरीद और निविदा प्रक्रियाओं में सहयोग देंगे। सिविल इंजीनियर परियोजनाओं की लागत, निर्माण संबंधी अनुमान और तकनीकी पहलुओं पर काम करेंगे।
टूरिज्म एक्सपर्ट नए पर्यटन उत्पादों की योजना बनाने और सरकारी विभागों तथा स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे। इसके अलावा जिला स्तर पर इकोटूरिज्म कंसल्टेंट तैनात किए जाएंगे। वे पर्यटकों की संख्या, उपलब्ध सुविधाओं और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़े आंकड़े जुटाकर मासिक रिपोर्ट तैयार करेंगे।
पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय प्रशिक्षण पर भी फोकस
किसी भी पर्यटन स्थल के विकास से पहले उसकी संभावनाओं और पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। स्थल चयन में सड़क संपर्क के साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और वन संरक्षण कानूनों के प्रावधानों का ध्यान रखा जाएगा।
PMU पानी, बिजली, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन और दूरसंचार जैसी सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन भी करेगी। प्रत्येक स्थल पर पर्यटकों की अधिकतम सुरक्षित संख्या निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक आधार पर वहन क्षमता का अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता को सुरक्षित रखना है।
स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को पर्यटन प्रबंधन तथा आतिथ्य सत्कार का प्रशिक्षण देने के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए जाएंगे। इससे पर्यटन से होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने की कोशिश होगी।
कुछ जिम्मेदारियां PMU के दायरे से बाहर
प्रस्तावित व्यवस्था में ट्रैफिक सर्वे, घर-घर जाकर प्राथमिक आंकड़े जुटाना और निर्माण कार्यों की प्रत्यक्ष निगरानी को PMU की नियमित जिम्मेदारियों में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर इससे जुड़ी मूल परामर्शदाता कंपनी आपसी सहमति से तय शुल्क पर ये अतिरिक्त काम भी कर सकेगी।
इस पहल के जरिए झारखंड में इकोटूरिज्म को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने, निजी निवेश बढ़ाने और स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करने का लक्ष्य रखा गया है।









