Table of Contents

झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब परिवारों को सस्ती दर पर दाल उपलब्ध कराने की योजना सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री दाल वितरण योजना के लिए चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 600 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, लेकिन राशन दुकानों तक नियमित आपूर्ति नहीं पहुंच रही है। इसका सीधा असर सरकारी राशन पर निर्भर परिवारों पर पड़ रहा है।
राशन डीलरों के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में उन्हें केवल दो महीने की दाल मिली है। वहीं, विभागीय जानकारी के अनुसार, तीन महीने की आपूर्ति के लिए टेंडर जारी किया गया था और संबंधित कंपनी को फरवरी में ही भुगतान भी कर दिया गया। इसके बावजूद लाभुकों तक दाल पहुंचने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
आहार पोर्टल पर वितरण का रिकॉर्ड नहीं
दाल वितरण में अनियमितता के बीच निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग के आहार पोर्टल पर दाल वितरण का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि कितनी दाल की आपूर्ति हुई और कितने लाभुकों को इसका फायदा मिला। विभाग ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी है।
राज्य सरकार स्मार्ट पीडीएस व्यवस्था लागू होने का दावा करती है। इस प्रणाली में पॉस मशीन को इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन से जोड़कर राशन वितरण का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज किया जाता है। हालांकि, दाल वितरण के मामले में इसका प्रभावी इस्तेमाल होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में टेंडर और भुगतान के बावजूद आपूर्ति बाधित रहने के कारणों पर सवाल उठ रहे हैं।
करीब 60 लाख राशन कार्डधारकों पर असर
झारखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 59,83,918 राशन कार्डधारी हैं। इसके अलावा राज्य की योजनाओं के तहत पात्र ग्रीन कार्डधारकों को एक रुपये प्रति किलो की दर से हर महीने एक किलो चना दाल देने का प्रावधान है। लेकिन आपूर्ति नियमित नहीं होने से लाभुकों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
राजधानी रांची की राशन दुकानों में भी दाल की कमी का असर दिख रहा है। राशन डीलर दीपक गुप्ता के अनुसार, जब सरकार की ओर से सामग्री ही उपलब्ध नहीं कराई जाएगी, तो दुकानदार लाभुकों को क्या वितरित करेंगे? उन्होंने बताया कि दाल के साथ चीनी की आपूर्ति भी लंबे समय से बाधित है। ऐसे में राशन लेने पहुंचने वाले लोगों को संतोषजनक जवाब देना मुश्किल हो जाता है।
त्योहार में भी नहीं मिली राहत
राशन कार्डधारक शिव कुमार ने कहा कि त्योहार के दौरान भी दाल नहीं मिलना निराशाजनक है। सरकार को गरीब परिवारों के लिए अनाज, दाल, चीनी और कपड़े जैसी जरूरी वस्तुओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
600 करोड़ रुपये के बजट और आपूर्ति के लिए भुगतान किए जाने के बावजूद दाल वितरण की स्थिति स्पष्ट नहीं होना व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। अब जिलों से मांगी गई रिपोर्ट के बाद ही आपूर्ति में देरी और वितरण की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।






