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CJP प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर अन्नामलाई ने उठाए सवाल, BJP ने SIR पर पुराने बयान याद दिलाए

by उर्वशी शेखर
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तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले में केंद्र सरकार की आलोचना की है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने अपनी बात के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2011 के एक बयान का हवाला दिया। वहीं, उनके रुख पर भाजपा की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं।

अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस साल जून में भाजपा से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें मोदी ने रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आधी रात को हुई पुलिस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई थी।

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अन्नामलाई के मुताबिक, उस समय मोदी ने कहा था कि यदि उनके हाथ बंधे नहीं होते, तो वह दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष करते। अन्नामलाई ने इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में कानूनी प्रक्रिया के पालन पर सवाल उठाना गलत नहीं है।

कानूनी प्रक्रिया और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर उठाए सवाल

अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में प्रदर्शनकारियों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है और उनकी जमानत भी खारिज हो सकती है। उन्होंने प्रिवेंटिव बॉन्ड से जुड़े मामलों में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को मिले अधिकारों का जिक्र करते हुए कहा कि इनका इस्तेमाल लोगों को परेशान करने के लिए किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानूनी प्रक्रियाओं के उल्लंघन पर सवाल उठाने वालों को आलोचना और आरोपों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, विरोध करने वालों को कभी-कभी विदेशी एजेंट तक कह दिया जाता है।

अन्नामलाई ने बताया कि NEET परीक्षा के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करने की अपील की थी। इसके बाद से उन्हें लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह इन टिप्पणियों पर ध्यान देने के बजाय तमिलनाडु के स्थानीय मुद्दों पर काम करने को प्राथमिकता देते रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि आलोचनाओं के बीच उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा की ‘बी-टीम’ होने का आरोप उन पर से हटेगा और तमिलनाडु में उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत होगी।

SIR पर पुराने रुख को लेकर भाजपा ने घेरा

अन्नामलाई की टिप्पणी पर भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने उन पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर अपना रुख बदलने का आरोप लगाया।

तिरुपति के अनुसार, भाजपा में रहते हुए अन्नामलाई मतदाता सूची के SIR अभियान का समर्थन करते थे। उन्होंने दावा किया कि अन्नामलाई ने तमिलनाडु में फर्जी मतदाताओं की मौजूदगी का मुद्दा उठाया था और मतदाता सूची से ऐसे नाम हटाने की जरूरत बताई थी। तिरुपति ने यह भी कहा कि उस समय अन्नामलाई ने इस प्रक्रिया का विरोध करने के लिए डीएमके की आलोचना की थी।

भाजपा प्रवक्ता ने मई 2026 में कांग्रेस नेता शशि थरूर के साथ अन्नामलाई की सार्वजनिक बहस का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, उस चर्चा में अन्नामलाई ने SIR को आवश्यक और निष्पक्ष प्रक्रिया बताते हुए इसका बचाव किया था तथा विपक्ष पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया था।

इस तरह, CJP प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर अन्नामलाई की टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। एक ओर उन्होंने कानूनी प्रक्रिया और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने उनके पुराने बयानों का हवाला देकर उनके मौजूदा रुख पर निशाना साधा है।

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