मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की पढ़ने योग्य डिजिटल कॉपी देने और 17 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में वार्षिक विशेष पुनरीक्षण (SSR) शुरू करने की पहल की है।

कांग्रेस ने पहले फैसले का श्रेय राहुल गांधी को देते हुए इसे अपनी मांग की जीत बताया, लेकिन पार्टी ने आयोग के कदम को अपर्याप्त करार दिया है।
CEC के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 2025 से ही मशीन-पठनीय मतदाता सूची उपलब्ध कराने की मांग कर रही थी। उनके मुताबिक, देर से उठाया गया यह कदम चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े सवालों का समाधान नहीं है।
वेणुगोपाल ने मतदाता सूची से करोड़ों लोगों के मताधिकार प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए SIR रद्द करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग की। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को पद छोड़कर सरकारी गवाह बनने की सलाह भी दी। ये कांग्रेस के आरोप हैं, आयोग की ओर से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं।
क्या बदलेगा चुनाव आयोग का फैसला?
नए निर्देश के तहत राजनीतिक दलों को मतदाता सूची के प्रारूप और अंतिम संस्करण की ऐसी PDF कॉपी मिलेगी, जिसे पढ़ा जा सके। इसमें मतदाताओं की तस्वीरें नहीं होंगी। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार निर्धारित शुल्क और प्रक्रिया के अनुसार संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर (RO) या जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) से पेनड्राइव अथवा अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में भी सूची प्राप्त कर सकेंगे।
राहुल गांधी इसी तरह की डिजिटल मतदाता सूची की मांग करते रहे हैं, ताकि आंकड़ों की जांच करना आसान हो और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़े।17 राज्यों में वार्षिक पुनरीक्षण की तैयारीचुनाव आयोग ने SSR के लिए 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र भेजा है। इस नियमित प्रक्रिया के तहत पात्र नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, विवरणों में सुधार किया जाता है और नियमानुसार अपात्र या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं।
इस सूची में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा, बिहार, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के अलावा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मतदाता सूची का अद्यतन होना चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
SIR को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच आयोग के इन फैसलों से मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बहस और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस जहां इसे अपनी मांग के समर्थन में उठाया गया कदम मान रही है, वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही और पुनरीक्षण प्रक्रिया पर उसका विरोध जारी है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट






