Tuesday, October 6, 2026
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विधायक जयराम महतो बने ‘ डॉ.’, मां के सामने हासिल की बड़ी उपलब्धि

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झारखंड की राजनीति में युवा चेहरे के रूप में पहचान बना चुके डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के अध्यक्ष जयराम कुमार महतो ने अपनी शैक्षणिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 3 अक्टूबर 2026 को उन्हें बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU) से पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इस उपलब्धि के साथ अब उनके नाम के साथ ‘डॉ.’ जुड़ गया है। उपाधि प्राप्त करने के अवसर पर उनकी मां भी मौजूद थीं। जयराम महतो ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी मां और सहयोगियों को दिया।

संघर्षपूर्ण बचपन से उच्च शिक्षा तक का सफर

27 सितंबर 1994 को धनबाद जिले के तोपचांची क्षेत्र के मानटांड़ में जन्मे जयराम महतो का बचपन सामान्य परिस्थितियों में नहीं बीता। उनके पिता स्वर्गीय कृष्ण प्रसाद महतो झारखंड आंदोलन से जुड़ी विचारधारा रखते थे। कम उम्र में ही पिता के निधन के बाद जयराम को लंबे समय तक अपने मामा के घर रहकर शिक्षा जारी रखनी पड़ी।

पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को प्राथमिकता दी। अंग्रेजी विषय में उच्च शिक्षा हासिल करते हुए उन्होंने धनबाद के पीके रॉय मेमोरियल कॉलेज से अंग्रेजी ऑनर्स और फिर एमए की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2017 में उन्होंने स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी की। इसके बाद अंग्रेजी साहित्य में शोध की दिशा में आगे बढ़े।

उनके शोध का विषय औपनिवेशिक और उत्तर-औपनिवेशिक साहित्य में हाशिये पर मौजूद समुदायों के अनुभव और उनके शोषण की जटिलताओं से जुड़ा रहा। इसी शोध कार्य को पूरा करने के बाद उन्हें वर्ष 2026 में पीएचडी की उपाधि मिली।

छात्र आंदोलनों से सक्रिय राजनीति तक

जयराम महतो की राजनीतिक पहचान छात्र और युवा आंदोलनों के दौर में मजबूत हुई। वर्ष 2022 के बाद उन्होंने रोजगार, स्थानीय युवाओं के लिए अवसर, नियोजन नीति और झारखंड की भाषाई-सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया।

ग्रामीण इलाकों में युवाओं के बीच बैठकों और सभाओं के जरिए उन्होंने इन विषयों पर अपनी बात रखी। इसी सक्रियता से झारखंडी भाषा खतियानी संघर्ष समिति (JBKSS) का गठन हुआ। आगे चलकर यही राजनीतिक गतिविधियां झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा यानी JLKM के रूप में विकसित हुईं।

लोकसभा चुनाव ने बनाई बड़ी राजनीतिक पहचान

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जयराम महतो ने गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। उन्हें करीब 3.5 लाख से अधिक मत मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। उस समय उनका संगठन चुनाव आयोग में राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत नहीं था।

लोकसभा चुनाव के परिणाम ने झारखंड की राजनीति में उनकी लोकप्रियता और प्रभाव को नई पहचान दी। इसके बाद उनका अगला लक्ष्य विधानसभा चुनाव रहा।

डुमरी से विधायक बनने तक का सफर

2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में जयराम महतो ने JLKM के उम्मीदवार के तौर पर डुमरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। नवंबर 2024 से उन्होंने विधानसभा सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक पारी शुरू की।विधायक बनने के बाद भी रोजगार, स्थानीय युवाओं के लिए अवसर, झारखंडी भाषा और संस्कृति, जल-जंगल-जमीन, स्थानीय अधिकार, 1932 के खतियान, शिक्षा तथा क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दे उनके सार्वजनिक जीवन के केंद्र में रहे हैं। विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर वे इन विषयों को लगातार उठाते रहे हैं।

विधायक की जिम्मेदारी के साथ पूरी की शोध यात्रा

जयराम महतो के राजनीतिक सफर की खास बात यह रही कि उन्होंने जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारियों के साथ अपनी अकादमिक यात्रा भी जारी रखी। सक्रिय राजनीति में आने, चुनाव लड़ने और विधायक बनने के बीच उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में अपने शोध कार्य को पूरा किया।3 अक्टूबर 2026 को पीएचडी की उपाधि मिलने के साथ उनके जीवन की यह यात्रा एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंची। उनका सफर ग्रामीण पृष्ठभूमि, बचपन के संघर्ष, उच्च शिक्षा, सामाजिक सक्रियता, आंदोलन, चुनावी राजनीति और शोध; इन सभी चरणों से होकर गुजरा है।

जयराम महतो की कहानी इस मायने में भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने राजनीतिक सक्रियता के बीच अपनी शैक्षणिक प्रतिबद्धता को जारी रखा और विधायक रहते हुए डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। उनके समर्थकों के लिए यह उपलब्धि राजनीतिक सफर के साथ शिक्षा के प्रति उनकी निरंतरता का भी उदाहरण है।

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