7 सितंबर 1978। बिहार-उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसे सिताबदियरा के लिए यह दिन आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। लोकनायक जयप्रकाश नारायण उस दिन अपने पैतृक गांव पहुंचे थे। तीन दिन तक गांव में रहने के बाद जब उन्होंने विदाई ली, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह अपने गांव के लिए जेपी की आखिरी यात्रा होगी।

विदा होने से पहले हेलीकॉप्टर ने सिताबदियरा के ऊपर दो चक्कर लगाए। नीचे पूरा गांव उमड़ पड़ा था। लोग अपने प्रिय नेता को हाथ हिलाकर विदा कर रहे थे। चारों ओर जेपी के समर्थन में नारे गूंज रहे थे। हेलीकॉप्टर से जेपी भी देर तक अपने गांव और वहां जुटे लोगों को देखते रहे। इसके बाद हेलीकॉप्टर आसमान में गुम हो गया और जेपी फिर कभी सिताबदियरा नहीं लौट सके।
तीन दिन गांव में रहे थे जेपी
सिताबदियरा के बुजुर्ग जैनेंद्र कुमार सिंह और श्री राम यादव के मुताबिक, जेपी के गांव पहुंचने की खबर मिलते ही उनसे मिलने वालों का तांता लग गया था। तीन दिनों तक गांव में उनका रहना स्थानीय लोगों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। देश के बड़े नेता के साथ-साथ गांव वालों के लिए जेपी अपने घर के सदस्य जैसे थे।
दलजीत टोला के आनंद बिहारी सिंह आज भी उस मुलाकात को याद करते हैं। उनके मुताबिक, एक शाम जेपी अपने आंगन में बैठे थे। इसी दौरान गांव की कई महिलाएं पीछे के दरवाजे से उन्हें देखने पहुंचीं। कुछ महिलाएं उनके पैर छूने लगीं तो जेपी ने सहज अंदाज में भोजपुरी में उन्हें ऐसा करने से मना किया।
इसी बीच एक बुजुर्ग महिला ने मजाकिया अंदाज में कहा कि महिलाएं उनकी नातिन-पतोहू जैसी हैं। जेपी मुस्कुरा दिए और फिर महिलाओं को आशीर्वाद लेने दिया। ग्रामीणों के लिए वह मुलाकात आज भी एक भावुक स्मृति है।
चंद्रशेखर के साथ भरी थी आखिरी उड़ान
तीन दिन बाद जेपी के गांव से लौटने का वक्त आया। उनके साथ पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी मौजूद थे। दोनों हेलीकॉप्टर से रवाना हुए। उड़ान भरने के बाद हेलीकॉप्टर ने सिताबदियरा के ऊपर दो बार चक्कर लगाया।
नीचे हजारों की भीड़ अपने लोकनायक को आखिरी विदाई दे रही थी। लोग हाथ हिला रहे थे और जेपी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। हेलीकॉप्टर जब गांव के ऊपर से गुजरा तो जेपी कुछ देर खड़े होकर नीचे देखते रहे। मानो वह अपने गांव, अपनी मिट्टी और अपने लोगों की तस्वीर आंखों में हमेशा के लिए बसा लेना चाहते हों।
उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह दृश्य जेपी और सिताबदियरा की आखिरी मुलाकात बन जाएगा।
एक साल बाद आई मौत की खबर
हेलीकॉप्टर के आसमान में ओझल होने के बाद सिताबदियरा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लौट गया। लेकिन करीब एक वर्ष बाद जब जयप्रकाश नारायण के निधन की खबर गांव पहुंची तो पूरा इलाका शोक में डूब गया। लोगों के जेहन में उनकी वही आखिरी तस्वीर ताजा हो गई; आसमान में उड़ता हेलीकॉप्टर, नीचे हाथ हिलाता गांव और अपने लोगों को निहारते जेपी।
लोकनायक की वह अंतिम उड़ान आज भी सिताबदियरा की सामूहिक स्मृति का हिस्सा है। उनका सपना और संदेश भी उसी तरह याद किया जाता है: “संपूर्ण क्रांति अब नारा है, भावी इतिहास हमारा है।”
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट






