भारतीय रेलवे ने देशभर में संचालित 18 ट्रेनों की श्रेणी में बदलाव करने का निर्णय लिया है। निर्धारित गति सीमा के मानकों पर खरा नहीं उतरने के कारण इन ट्रेनों को अब सुपरफास्ट की जगह सामान्य एक्सप्रेस के रूप में संचालित किया जाएगा। इस फैसले का सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि सुपरफास्ट श्रेणी समाप्त होने के बाद टिकट पर लगने वाला अतिरिक्त सरचार्ज भी नहीं देना होगा।

रेलवे की इस समीक्षा का असर मध्य रेलवे की कई प्रमुख ट्रेनों पर पड़ेगा। प्रभावित ट्रेनों में मुंबई-हिंगोली जनशताब्दी एक्सप्रेस, मुंबई-पुणे प्रगति एक्सप्रेस, मुंबई-बनारस महानगरी एक्सप्रेस और लोकमान्य तिलक टर्मिनस-अयोध्या तुलसी एक्सप्रेस के नाम शामिल हैं।
रेलवे के अनुसार, सुपरफास्ट श्रेणी में बने रहने के लिए ट्रेनों को पूरे मार्ग पर औसतन 55 किलोमीटर प्रति घंटे की निर्धारित गति हासिल करनी होती है। समीक्षा में शामिल 18 ट्रेनें इस मानक को पूरा नहीं कर सकीं। इसी आधार पर रेलवे ने इनके सुपरफास्ट दर्जे को समाप्त करने का फैसला किया है।
नए साल से बदल जाएंगे ट्रेन नंबर और किराया
रेलवे का यह निर्णय 1 जनवरी 2027 से लागू होगा। इसके साथ ही संबंधित ट्रेनों की पहचान भी बदल जाएगी। मौजूदा ट्रेन नंबरों की जगह नए नंबर जारी किए जाएंगे और इनका परिचालन सामान्य एक्सप्रेस श्रेणी के तहत होगा।
इस बदलाव से यात्रियों को टिकट बुकिंग के दौरान सुपरफास्ट शुल्क नहीं देना पड़ेगा, जिससे यात्रा खर्च में कुछ कमी आएगी। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि जनवरी से इन ट्रेनों में सफर की योजना बनाने से पहले आईआरसीटीसी या रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर नए ट्रेन नंबर और परिचालन संबंधी जानकारी जरूर जांच लें।









