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झारखंड के साहिबगंज में पकड़े गए बांग्लादेशी युवक सुमोन मियां से पूछताछ के बाद सुरक्षा एजेंसियां उसके संपर्कों और भारत में प्रवेश के रास्तों की जांच में जुट गई हैं। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया है कि जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में 3,000 से अधिक बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। उसके मुताबिक, इनमें से कई लोग कबाड़ के कारोबार या कबाड़ बीनने के काम से जुड़े हैं। हालांकि, श्रीनगर में अवैध रूप से रह रहे लोगों की संख्या से संबंधित इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
जानकारी के अनुसार, 8 अक्टूबर को सुमोन मियां अपने चार अन्य साथियों के साथ दिल्ली से असम जाने के लिए ब्रह्मपुत्र मेल में सवार था। वह ट्रेन के जनरल कोच में सामान रखने के लिए बने ऊपरी बर्थ पर सो रहा था। इसी दौरान उसकी पहचान और गतिविधियों की जांच की गई, जिसमें उसके बांग्लादेशी नागरिक होने का संदेह सामने आया।
तलाशी के दौरान उसके पास से बांग्लादेश का पहचान पत्र, पाकिस्तान और नेपाल की मुद्राओं के साथ भारतीय रुपये भी बरामद किए जाने की बात कही गई है। इसके बाद रेलवे पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों ने भी उससे पूछताछ की। रविवार को सुमोन को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे साहिबगंज मंडल कारा भेज दिया गया।
मामले की जानकारी मिलते ही साहिबगंज पहुंची ATS
सुमोन से पूछताछ की जानकारी मिलने के बाद झारखंड आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) भी सक्रिय हो गया। रांची से अधिकारियों की एक टीम साहिबगंज पहुंची, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही आरोपी को जेल भेजा जा चुका था।
अब एटीएस अदालत से आवश्यक अनुमति लेकर जेल में उससे पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच एजेंसी का फोकस उसके भारत में प्रवेश के तरीके, संभावित मददगारों और देश के अलग-अलग हिस्सों में उसके संपर्कों का पता लगाने पर है।
सीमा पार कराने वाले एजेंटों की तलाश
पूछताछ के दौरान सुमोन ने कथित तौर पर बताया कि एजेंटों की मदद से बांग्लादेश से भारत आने और यहां रोजगार तलाशने की व्यवस्था की जाती है। उसके इस बयान के आधार पर जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या उसके भारत आने के पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
जांच में कुछ अहम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। सुमोन ने भारत में किस रास्ते से प्रवेश किया, उसे सीमा पार कराने में किसकी भूमिका थी और यात्रा के दौरान उसके पास पाकिस्तान तथा नेपाल की मुद्रा कैसे पहुंची; इन पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
इसके साथ ही उसके चारों साथियों की पहचान, उनके आपसी संबंध और भारत में उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाना भी जांच का हिस्सा है।
श्रीनगर में 3 हजार से अधिक लोगों के रहने का दावा
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण दावा श्रीनगर में बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर सामने आया है। सुमोन के मुताबिक, वहां 3,000 से अधिक बांग्लादेशी नागरिक कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे हैं। उसने दावा किया कि इनमें बड़ी संख्या में लोग कबाड़ खरीदने-बेचने या उसे इकट्ठा करने के काम में लगे हैं।
हालांकि, यह संख्या फिलहाल पूछताछ में सामने आए दावे पर आधारित है। इसकी पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच और संबंधित साक्ष्यों की जरूरत होगी। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि सुमोन की बताई जानकारी कितनी विश्वसनीय है और क्या उसके संपर्क श्रीनगर के अलावा दूसरे शहरों तक भी फैले हुए हैं।
आगे की पूछताछ से खुल सकते हैं कई राज
साहिबगंज में हुई गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा आरोपी की पहचान तक सीमित नहीं है। एजेंसियां उसके संभावित मददगारों, यात्रा के रास्तों और भारत में रहने की व्यवस्था कराने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
एटीएस की पूछताछ और अन्य जांच एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, श्रीनगर में कथित तौर पर रह रहे लोगों की संख्या और किसी व्यापक नेटवर्क की मौजूदगी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।






