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JSSC-CGL परीक्षा 2024 के प्रश्न-पत्र लीक मामले में मंगलवार को एजेसी योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई होनी थी। हालांकि, गवाह के अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अदालत ने अब अगली सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तारीख तय की है।
सुनवाई के दौरान मामले के मुख्य आरोपियों अमन कुमार उर्फ अमन कुमार सिंह, संकेश कुमार गोड़, वीरेंद्र कुमार शर्मा और मोनू कुमार उर्फ मोनू कुमार गुर्जर ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से अदालत में उपस्थिति दर्ज कराई।
परीक्षा के दौरान सामने आया था पेपर लीक का मामला
दरअसल, 28 जनवरी 2024 को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से राज्यभर में प्रतियोगी परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान प्रश्न-पत्र और उत्तर के लीक होने की जानकारी सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद आयोग की तत्कालीन पदाधिकारी मधुमिता कुमारी की लिखित शिकायत पर नामकुम थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 420 और 120-बी, आईटी एक्ट की धारा 66 तथा झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण) अधिनियम, 2023 की धारा 12 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। केस की जांच की जिम्मेदारी तत्कालीन डीएसपी प्रभात रंजन बरवार को दी गई थी।

ई-मेल से मिले उत्तरों ने खोला था लीक का राज
प्राथमिकी के मुताबिक, 28 जनवरी को राज्य के 735 परीक्षा केंद्रों पर तीन पालियों में परीक्षा आयोजित की जा रही थी। इसी दौरान आयोग के आधिकारिक ई-मेल पर एक अज्ञात ई-मेल आईडी से दो संदेश पहुंचे। ये ई-मेल दोपहर 2:32 बजे और 2:38 बजे भेजे गए थे।
दूसरे ई-मेल में चार पन्नों पर तीसरी पाली के सामान्य ज्ञान विषय के प्रश्नों के उत्तर क्रमवार दिए गए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद आयोग ने जब इन उत्तरों का वास्तविक प्रश्न-पत्र से मिलान किया, तो 150 में से अधिकांश प्रश्नों के उत्तर आपस में मेल खाते पाए गए। इससे पेपर लीक की आशंका पुख्ता हुई और आयोग ने तीसरी पाली की परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया।
आउटसोर्स एजेंसी के जिम्मे थी प्रश्न-पत्र की पूरी प्रक्रिया
जांच में यह पहलू भी सामने आया कि आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र तैयार करने, उनकी छपाई, पैकिंग और परीक्षा के बाद रिजल्ट तैयार करने तक की प्रक्रिया एक चयनित आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से संचालित होती थी।
शिकायत के अनुसार, एजेंसी ने 22 और 23 जनवरी को परीक्षा सामग्री को रांची जिला कोषागार में सीलबंद स्थिति में जमा कराया था। इसके बाद 23 और 24 जनवरी को सामग्री संबंधित जिलों के अधिकृत दंडाधिकारियों को सौंपी गई।
परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न-पत्र की सील परीक्षा शुरू होने से महज 15 मिनट पहले दंडाधिकारी और परीक्षार्थियों की मौजूदगी में खोलने का प्रावधान था। परीक्षा समाप्त होने तक किसी केंद्र से सील टूटने अथवा गोपनीय परीक्षा सामग्री की सुरक्षा प्रभावित होने की शिकायत नहीं मिली थी।
इसके बावजूद ई-मेल के जरिए उत्तर सामने आने के बाद मामले की जांच तेज की गई। पुलिस ने साइबर जांच और संबंधित ई-मेल आईडी से मिले सुरागों के आधार पर कथित पेपर लीक नेटवर्क की पड़ताल शुरू की और मामले से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया। अब इसी मामले में अदालत में गवाही की प्रक्रिया आगे बढ़नी है।