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झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं की जांच कर रही CID को दो आरोपियों के खिलाफ तकनीकी और वित्तीय साक्ष्य मिले हैं। जांच के केंद्र में संदीप कुमार और धर्मराज हैं। दोनों के मोबाइल, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की पड़ताल में परीक्षा में कथित सेटिंग और पैसों के लेन-देन से जुड़े अहम सुराग सामने आए हैं।
जांच में सामने आया है कि संदीप कुमार और धर्मराज LIC एजेंट के रूप में काम करते थे। अब CID यह पता लगाने में जुटी है कि बीमा एजेंसी के काम के साथ-साथ वे कथित तौर पर नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे नेटवर्क से किस तरह जुड़े और इस पूरे मामले में उनकी भूमिका क्या थी।
CID ने जांच के दौरान संदीप कुमार के पास से एक सैमसंग मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए थे। मोबाइल की तकनीकी जांच और इलेक्ट्रॉनिक डेटा के विश्लेषण के दौरान कॉल लॉग सहित कई डिजिटल जानकारियां मिलीं।
इन रिकॉर्ड के आधार पर संदीप के अन्य आरोपियों के साथ लगातार संपर्क में रहने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब इन संपर्कों की प्रकृति, बातचीत के संभावित उद्देश्य और कथित सेटिंग नेटवर्क में उसकी भूमिका की पड़ताल कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों के जरिए यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनके बीच किस तरह तालमेल था।
बैंकिंग दस्तावेजों ने बढ़ाई जांच की अहमियत
दूसरे आरोपी धर्मराज के पास से उसके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और कई महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनमें एक हस्ताक्षरित सादा SBI चेक और दो बड़े मूल्य के बीयरर चेक शामिल हैं।
जांच के दौरान सामने आए विवरण के मुताबिक, एक चेक 9.90 लाख रुपये का था, जो राजेश प्रसाद यादव के नाम पर था। वहीं, दूसरा चेक 8.40 लाख रुपये का था, जो नौखीलाल दास के नाम पर जारी किया गया था।
इन दस्तावेजों के आधार पर CID संबंधित बैंक खातों, रकम के स्रोत और लेन-देन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन चेकों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और क्या इनका संबंध CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं से है।
सफल अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से लेन-देन की जांच
CID की वित्तीय पड़ताल में आरोपी और सफल अभ्यर्थियों, उनके रिश्तेदारों तथा परीक्षा से जुड़े अन्य लोगों के बीच बड़ी रकम के लेन-देन के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए थे।
हालांकि, बरामद चेक और वित्तीय लेन-देन के आधार पर प्रत्येक भुगतान का उद्देश्य तथा कथित अनियमितताओं से उसका संबंध स्थापित करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए संबंधित लोगों के बयान, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।
सेटिंग सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ रही CID
JSSC-CGL परीक्षा में कथित धांधली के मामले में CID अब तकनीकी साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड को जोड़कर पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट करने में जुटी है। संदीप के मोबाइल से मिले संपर्कों और धर्मराज के पास से बरामद बैंकिंग दस्तावेजों को जांच के अहम पहलुओं के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दोनों आरोपियों की कथित भूमिका कितनी व्यापक थी, रकम का वास्तविक लेन-देन किन परिस्थितियों में हुआ और नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल थे। जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।






