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झारखंड में लघु खनिजों के खनन से जुड़ी कई परियोजनाओं को राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA-सिया) ने मंजूरी दी है। इनमें दुमका में पत्थर खनन, लातेहार में ईंट मिट्टी और साहिबगंज में पत्थर व साधारण मिट्टी की परियोजनाएं शामिल हैं। हालांकि, स्वीकृति के साथ पर्यावरण संरक्षण, धूल नियंत्रण, पौधारोपण और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर कई शर्तें भी लगाई गई हैं।
दुमका में पत्थर खदान के लिए TOR स्वीकृत
दुमका जिले के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के लोवापारा गांव में मेसर्स लक्ष्मी स्टोन वर्क्स की 1.963 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित पत्थर खनन परियोजना को टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) की मंजूरी मिली है।
परियोजना संचालक को खदान की प्रस्तावित सीमा से 500 मीटर के दायरे में रहने वाली आबादी को ध्यान में रखते हुए विस्तृत पर्यावरण प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी। इसे पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट का हिस्सा बनाना अनिवार्य होगा।
लातेहार और साहिबगंज की परियोजनाओं को भी मंजूरी
लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र के लतदाग मौजा में मेसर्स टॉप ब्रिक्स की 0.32 हेक्टेयर भूमि पर ईंट निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी के खनन को पर्यावरणीय स्वीकृति दी गई है।
वहीं, साहिबगंज जिले के बरहरवा, कोटलपोखर और आसपास के क्षेत्रों में चार साधारण मिट्टी खनन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इनमें मेसर्स किसान ब्रिक्स फील्ड, मेसर्स सोनी ब्रिक्स फील्ड, मेसर्स जय जवान और मेसर्स डायमंड ब्रिक्स की परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा साहिबगंज के मांडरो अंचल के पकारिया गांव में मेसर्स जय मां तारा स्टोन वर्क्स की 2.934 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित पत्थर खदान को भी पर्यावरणीय मंजूरी मिली है। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, खदान का पट्टा क्षेत्र वन सीमा से 400 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित है।
हरित क्षेत्र के लिए 10% भूमि पर पौधारोपण जरूरी
सिया ने स्वीकृत परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य किया है। निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, प्रस्तावित हरित क्षेत्र का 10 प्रतिशत हिस्सा पौधारोपण के लिए इस्तेमाल करना होगा। इससे संबंधित जानकारी केंद्र सरकार के ‘मेरी लाइफ’ पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
इसके अतिरिक्त, सुरक्षा क्षेत्र में प्रस्तावित पौधारोपण के क्षेत्रफल से दोगुने क्षेत्र में खदान के आसपास उपलब्ध बाहरी भूमि पर पौधे लगाने होंगे। पौधों की ऊंचाई कम से कम दो मीटर होनी चाहिए। उनकी देखभाल तीन वर्षों तक करनी होगी और जियो-टैग तस्वीरों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
धूल नियंत्रण के लिए वाटर टैंकर अनिवार्य
खनन गतिविधियों से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए प्रत्येक परियोजना में समर्पित वाटर टैंकर रखना होगा। इसका इस्तेमाल खदान की सड़कों पर पानी छिड़कने और नए पौधों की सिंचाई के लिए किया जाएगा। धूल कम करने के उद्देश्य से सड़कों को नियमित रूप से नम रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच पर जोर
खनन परियोजनाओं में काम करने वाले सभी श्रमिकों को हेलमेट, सुरक्षा चश्मे और सुरक्षात्मक कपड़ों सहित जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने होंगे। इन उपकरणों की गुणवत्ता कम से कम 3M ब्रांड के समकक्ष होनी चाहिए।
इसके साथ ही, काम शुरू होने से पहले और उसके बाद हर वर्ष कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच करानी होगी। खदान के जोखिम वाले हिस्सों को मानवरहित रखने और कर्मचारियों की ड्यूटी रोटेशन प्रणाली के तहत लगाने की शर्त भी निर्धारित की गई है।
हर छह महीने में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
परियोजना संचालकों को खनन गतिविधियों और सुरक्षा मानकों के पालन की रिपोर्ट प्रत्येक छह महीने में जियो-टैग तस्वीरों के साथ जमा करनी होगी। पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी शर्तों के उल्लंघन पर स्वीकृति रद्द किए जाने की कार्रवाई हो सकती है।
इन शर्तों के जरिए खनन गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय नुकसान को सीमित करने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।






