झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में दोनों पक्षों ने मामले पर विस्तार से अपनी दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद अदालत ने मुख्यमंत्री की ओर से दाखिल अंतरिम आवेदन (IA) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और अधिवक्ता शशांक शेखर ने पक्ष रखा। इस याचिका के जरिए रांची की विशेष PMLA अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें हेमंत सोरेन की आरोपमुक्ति की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई थी।

8 जून के PMLA कोर्ट के आदेश को चुनौती
रांची की विशेष PMLA अदालत ने 8 जून 2026 को हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज की थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, सोरेन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है और मामले में ED को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया गया था।
मामला रांची के बड़गाईं क्षेत्र की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में हेमंत सोरेन को आरोपी बनाया है। आरोपों से सोरेन इनकार करते रहे हैं।

अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
मुख्यमंत्री की ओर से निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। बुधवार को इस पहलू पर दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।
अब मामले में हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार है। गौरतलब है कि इसी मामले में हाईकोर्ट ने 9 सितंबर की सुनवाई में ED को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था और अगली सुनवाई 14 अक्टूबर निर्धारित की थी।