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गोवा में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रही जांच ने अब झारखंड तक फैले एक कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। गोवा पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल (ANC) की जांच में सामने आए इनपुट के आधार पर झारखंड पुलिस मुख्यालय और सीआईडी से सहयोग मांगा गया है। पुलिस का फोकस अब उस कथित मास्टरमाइंड पर है, जिसके निर्देश पर झारखंड के युवकों के जरिए गोवा में गांजे की सप्लाई किए जाने का आरोप है।
गोवा में करीब 15 लाख का गांजा बरामद
मामला गोवा ANC थाना कांड संख्या 15/2026 से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, 7 जुलाई की शाम पणजी के अटल सेतु और केटीसी बस स्टैंड के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद तलाशी अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान दो युवकों को पकड़ा गया। उनके पास मौजूद दो बैगों की जांच में 14.953 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। इसकी अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धनबाद के टुंडी थाना क्षेत्र के कोरैया गांव निवासी भागीरथ कुमार और हजारीबाग के बरकट्ठा थाना क्षेत्र के बड़कांगांगो गांव निवासी प्रशांत कुमार सिंह के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पूछताछ में सामने आया सिवान कनेक्शन
पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर एक बड़े नेटवर्क का सुराग मिला। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार युवकों ने बताया कि गांजे की खेप गोवा के अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश अखिलेश गुप्ता नामक व्यक्ति से मिलते थे।
अखिलेश मूल रूप से बिहार के सिवान का रहने वाला बताया गया है और गोवा के पोंडा इलाके के शांतिनगर में उसका पता दर्ज है। हालांकि, पुलिस के मुताबिक वह फिलहाल फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।
दूसरे के नाम पर सिम, जांच में धनबाद तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान पुलिस ने अखिलेश से जुड़े मोबाइल नंबर और उसके कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) की पड़ताल की। यहां से जांच को एक और महत्वपूर्ण सुराग मिला। जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कथित तौर पर अखिलेश कर रहा था, वह धनबाद के तोपचांची थाना क्षेत्र की खुरडीह-ब्राह्मणडीहा निवासी काजल देवी के नाम पर पंजीकृत पाया गया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि महिला के दस्तावेजों पर सिम कैसे हासिल किया गया और उसका इस्तेमाल किस नेटवर्क के लिए किया जा रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि फर्जी या गलत दस्तावेजों के जरिए हासिल किए गए मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल तस्करी से जुड़े संपर्कों के लिए किया गया हो सकता है।

गोवा पुलिस ने झारखंड CID से मांगी मदद
मामले की गंभीरता को देखते हुए गोवा की एसपी सुनीता सावंत ने झारखंड सीआईडी की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के एसपी को पत्र भेजकर अखिलेश गुप्ता की गिरफ्तारी में सहयोग मांगा है। गोवा पुलिस की एक विशेष टीम भी झारखंड पहुंचकर जांच और संभावित कार्रवाई में शामिल होने की तैयारी में है।
गोवा पुलिस से मिले इनपुट के बाद झारखंड CID ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य के विभिन्न जिलों के एसएसपी और एसपी को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने तथा संभावित ठिकानों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। खास तौर पर धनबाद, हजारीबाग और गिरिडीह से जुड़े लिंक की जांच की जा रही है।
NDPS मामलों का पुराना आरोपी है कथित मास्टरमाइंड
जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, अखिलेश गुप्ता का गोवा में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। वह पहले एनडीपीएस एक्ट के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस के अनुसार, जमानत पर बाहर आने के बाद वह कुछ समय तक अदालत में पेश होता रहा, लेकिन बाद में सुनवाई की तारीखों पर उपस्थित नहीं हुआ और फरार हो गया।
अब झारखंड और गोवा की एजेंसियां उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों को खंगाल रही हैं।
ओडिशा से गोवा तक फैली सप्लाई चेन पर नजर
जांच एजेंसियां इस मामले को केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं मान रही हैं। उन्हें आशंका है कि इसके पीछे कई राज्यों में फैली सप्लाई चेन काम कर रही है। पुलिस की जांच में ओडिशा और आंध्र प्रदेश से गांजे की खेप झारखंड के रास्ते गोवा तक पहुंचाए जाने की संभावित कड़ी की भी पड़ताल की जा रही है।
बताया जा रहा है कि झारखंड के कुछ जिले इस नेटवर्क में ट्रांजिट प्वाइंट के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसके बाद लंबी दूरी की ट्रेनों अथवा निजी वाहनों के माध्यम से गांजे को गोवा पहुंचाने की आशंका है। हालांकि, इस पूरे रूट और नेटवर्क की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुराने मामलों से भी मिले झारखंड कनेक्शन के संकेत
गोवा में गांजा तस्करी के मामलों में झारखंड से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी पहले भी हो चुकी है। अप्रैल 2025 में गोवा पुलिस ने झारखंड के 21 वर्षीय युवक को करीब 4.90 लाख रुपये मूल्य के गांजे के साथ गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी।
इससे पहले दिसंबर 2022 में उत्तरी गोवा के करमाली रेलवे स्टेशन के पास एक 19 वर्षीय युवती को लगभग छह किलोग्राम गांजे के साथ पकड़ा गया था। इसके अलावा वास्को और जुआरीनगर के तटीय इलाकों में भी झारखंड मूल के लोगों की कथित संलिप्तता वाले मादक पदार्थ तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं।
इन घटनाओं के मद्देनजर एजेंसियों की चिंता अब केवल गांजे की बरामदगी तक सीमित नहीं है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि सप्लाई कहां से शुरू होती है, झारखंड में कौन लोग इसके लिए लॉजिस्टिक सहायता देते हैं और गोवा में अंतिम डिलीवरी तक नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
फिलहाल गोवा पुलिस और झारखंड CID के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान जारी है। संभावित ठिकानों की पहचान के बाद धनबाद, हजारीबाग और गिरिडीह में कार्रवाई किए जाने की संभावना है। अधिकारियों की नजर अब फरार अखिलेश गुप्ता की गिरफ्तारी के साथ-साथ पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने पर है।