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झारखंड पुलिस में 25 हजार सिपाही समेत हजारों पद खाली, 2017 के बाद नहीं हुई बड़ी बहाली

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में पुलिसकर्मियों की कमी अब कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। थानों से लेकर फील्ड ड्यूटी तक इसका असर दिख रहा है। राज्य पुलिस में सिपाही, दरोगा, इंस्पेक्टर और एएसआई के हजारों पद रिक्त हैं। लंबे समय से नई नियुक्तियां नहीं होने के कारण उपलब्ध जवानों और अधिकारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि कई स्तरों पर स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से भी कम पुलिसकर्मी उपलब्ध हैं।

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पुलिस बल में सबसे ज्यादा कमी सिपाही स्तर पर है। राज्य में इस पद के लिए 40 हजार पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल महज 15 हजार सिपाही ही कार्यरत हैं। इस तरह करीब 25 हजार पद खाली हैं। यानी कुल स्वीकृत पदों में लगभग 62.5 प्रतिशत रिक्त हैं। खास बात यह है कि 2017 के बाद सिपाही के पदों पर नई नियुक्ति नहीं हुई है। वहीं, राज्य में 4194 हवलदार कार्यरत हैं। पुलिस बल की मौजूदा जरूरतों को देखते हुए यह संख्या भी पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

दरोगा से एएसआई तक पद रिक्त

पुलिस महकमे में अधिकारियों की कमी भी कम गंभीर नहीं है। राज्य में दरोगा के 6750 स्वीकृत पदों के मुकाबले 4200 अधिकारी ही उपलब्ध हैं। इस तरह 2550 पद रिक्त हैं। वर्ष 2018 के बाद से दरोगा के पदों पर सीधी भर्ती नहीं हुई है।

इंस्पेक्टर स्तर पर भी 800 स्वीकृत पदों में से 650 ही भरे हुए हैं। इस श्रेणी में 150 पद खाली हैं। वहीं, सहायक अवर निरीक्षक (ASI) के 8000 पदों के विरुद्ध 6200 अधिकारी ही कार्यरत हैं। यानी इस स्तर पर भी 1800 पदों की कमी है।

पुलिस बल में रिक्तियों की स्थिति

पदस्वीकृत पदकार्यरत संख्यारिक्त पद
सिपाही40,00015,00025,000
दरोगा (SI)6,7504,2002,550
इंस्पेक्टर800650150
सहायक अवर निरीक्षक (ASI)8,0006,2001,800
कुल55,55026,05029,500

दरोगा और एएसआई की पर्याप्त संख्या नहीं होने से थानों में मामलों की जांच, निगरानी और अन्य पुलिस प्रक्रियाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

12 से 16 घंटे तक ड्यूटी कर रहे जवान

लगातार खाली पदों का सीधा असर मौजूदा पुलिसकर्मियों की कार्यशैली और दिनचर्या पर पड़ रहा है। वीआईपी सुरक्षा, अपराध नियंत्रण, त्योहारों के दौरान बंदोबस्त, विधि-व्यवस्था और थानों की नियमित जिम्मेदारियां संभालने के लिए सीमित बल को ही तैनात करना पड़ रहा है। ऐसे में पुलिसकर्मियों को रोजाना 12 से 16 घंटे तक काम करना पड़ रहा है।

लंबी ड्यूटी और लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण जवानों पर शारीरिक और मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है। पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए रिक्त पदों को भरना अब महकमे के सामने अहम चुनौती है।

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