Tuesday, October 6, 2026
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गंगा की तेज धार में फंसी जिंदगी! BSF ने 30 दिन के नवजात समेत 10 बांग्लादेशी नागरिकों को बचाया

by उर्वशी शेखर
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भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने एक बार फिर साहस और मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए गंगा नदी में फंसे 10 बांग्लादेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बचाए गए लोगों में तीन बच्चे, तीन महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं। इनमें महज 30 दिन का एक नवजात शिशु भी था, जिसकी हालत उस समय बेहद गंभीर थी।

घटना 12 सितंबर की शाम मालदा सेक्टर में 71वीं बटालियन की सीमा चौकी खांडुआ के आसपास की बताई गई है। ड्यूटी पर तैनात BSF जवानों की नजर नदी में बह रहे कुछ लोगों पर पड़ी। तेज धारा के बीच लोगों को डूबते देख जवानों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया।

तेज बहाव के बीच मोटर बोट से रेस्क्यू

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए BSF की टीम मोटर बोट लेकर नदी में उतरी। पानी का बहाव काफी तेज था और रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण था, लेकिन जवानों ने जोखिम उठाते हुए एक-एक कर सभी लोगों को नदी से बाहर निकाल लिया।

रेस्क्यू के बाद सामने आया कि यह परिवार पद्मा यानी गंगा नदी के रास्ते बांग्लादेश लौट रहा था। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे बांग्लादेश के जोहारपुर गांव के निवासी हैं और चपाई नवाबगंज से अपने गांव जा रहे थे। नदी पार करने के दौरान उनकी नाव अचानक नियंत्रण खो बैठी और पलट गई। इसके बाद तेज धारा उन्हें बहाकर भारतीय सीमा की ओर ले आई।

नवजात की हालत थी सबसे नाजुक

बचाए गए लोगों में शामिल 30 दिन के बच्चे की हालत गंभीर थी। BSF जवानों ने मौके पर जरूरी प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाया। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से उसकी हालत में सुधार हुआ और बाद में डॉक्टरों ने उसे खतरे से बाहर बताया।

इलाज और कागजी प्रक्रिया के बाद BGB को सौंपे गए

रेस्क्यू के बाद सभी 10 नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर लाया गया। आवश्यक चिकित्सीय देखभाल और निर्धारित कानूनी एवं प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद BSF ने सभी को सुरक्षित रूप से बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की 53वीं बटालियन के हवाले कर दिया।

इस पूरे घटनाक्रम में BSF जवानों की त्वरित प्रतिक्रिया ने न केवल नदी में फंसे लोगों की जान बचाई, बल्कि सीमा सुरक्षा के साथ मानवीय जिम्मेदारी निभाने की उनकी प्रतिबद्धता भी सामने आई।

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