उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की जांच के दौरान गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता पहचान पत्र संख्या (EPIC) से जुड़ा विवरण खोजने पर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम सामने आने की पुष्टि हुई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने दो संबंधित कर्मचारियों को मतदाता सूची के काम से हटाने और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है।

मामला बुधवार को तब चर्चा में आया, जब कांग्रेस ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद तैयार मतदाता सूची में अनियमितताओं का आरोप लगाया। यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया कि पीलीभीत सदर सीट पर जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम जोड़े गए। पार्टी का आरोप था कि अंतिम सूची जारी होने के बाद भी कुछ मतदाताओं के नाम में बदलाव किया गया।
कांग्रेस के अनुसार, कुछ मामलों में मतदाता पहचान पत्र का नंबर वही रहने के बावजूद उससे जुड़ा नाम बदल गया। इससे मतदाता सूची में अपना नाम होने को लेकर आश्वस्त लोगों के सामने मतदान के समय परेशानी खड़ी हो सकती है। पार्टी ने आशंका जताई कि ऐसी गड़बड़ियों के कारण पात्र मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। हालांकि, किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायत मिलने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी। जांच में सामने आया कि संबंधित EPIC नंबर ऑनलाइन खोजने पर दूसरे मतदाता का विवरण दिखाई दे रहा था। इसके बाद विधानसभा क्षेत्र संख्या 127, पीलीभीत के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और बीआरसी ऑपरेटर को मतदाता सूची संबंधी कार्य से हटाने तथा दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने गड़बड़ी को तत्काल दुरुस्त करने के साथ सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी पर भी स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा, पीलीभीत के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों और प्रदेश की अन्य सीटों पर भी मतदाता सूची की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में आगे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट






