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मंटू मुर्मू प्रकरण में ST आयोग सख्त, 28 अक्टूबर को गिरिडीह SP को आयोग के समक्ष पेश होने का निर्देश

by उर्वशी शेखर
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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक को 28 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा के समक्ष दोपहर 4 बजे रांची के सर्कुलर रोड स्थित न्यू सर्किट हाउस में सुनवाई निर्धारित की गई है। एसपी को मामले से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी साथ लाने को कहा गया है।

यह मामला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रदेश सह मंत्री मंटू मुर्मू से जुड़ा है। परिषद ने गिरिडीह पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस अधीक्षक ने आयोग को भेजे गए लिखित जवाब में तथ्यों को सही तरीके से पेश नहीं किया। संगठन का दावा है कि इससे आयोग के सामने गलत तस्वीर रखी गई। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस अधीक्षक की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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ABVP के मुताबिक, 21 अगस्त को झारखंड के सभी 24 जिलों में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के विरोध में प्रदर्शन किए गए थे। इसी कड़ी में गिरिडीह के झंडा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री के पुतला दहन कार्यक्रम में मंटू मुर्मू भी शामिल हुए थे। परिषद का कहना है कि मंटू मुर्मू आदिवासी समुदाय से आते हैं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

संगठन ने मंटू मुर्मू को छात्र बताते हुए कहा कि वे भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन में शामिल हुए थे। ABVP ने छात्रों के समर्थन में राज्यव्यापी आंदोलन तेज करने और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की भी बात कही है।

अब 28 अक्टूबर को आयोग के समक्ष होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है। इस दौरान गिरिडीह पुलिस की ओर से प्रस्तुत जवाब, संबंधित दस्तावेज और पूरे मामले के तथ्यों पर चर्चा होगी। सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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