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CJP Protest : ‘हर हिरासत का कानूनी आधार बताएं…’ सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा पूरा हिसाब

by उर्वशी शेखर
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दिल्ली में सीजेपी समर्थकों को कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई की। अदालत ने साफ किया कि किसी भी व्यक्ति की हिरासत कानून में निर्धारित प्रक्रिया के बाहर नहीं हो सकती। कोर्ट ने अधिकारियों से यह बताने को कहा कि किन परिस्थितियों में लोगों को हिरासत में लिया गया और इसके लिए कौन-सा कानूनी आधार अपनाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। अदालत ने हिरासत से जुड़े मामलों में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को भी 13 अक्टूबर को मुख्य मामलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

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हिरासत पर राज्य से मांगा पूरा ब्यौरा

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने की हर कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए। सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित लोगों को किन परिस्थितियों में रोका गया, उनके खिलाफ क्या प्रक्रिया अपनाई गई और हिरासत के पीछे वैधानिक आधार क्या था।

इसके अलावा 9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर दायर अवमानना याचिका पर भी नोटिस जारी किया गया है। अदालत के समक्ष यह आश्वासन भी दर्ज किया गया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने पेशेवर दायित्व निभाने से नहीं रोका जाएगा।

मेट्रो, इंटरनेट और आवाजाही को लेकर भी निर्देश

विशेष सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सामान्य जनजीवन और नागरिक अधिकारों से जुड़े कई निर्देश दिए। अदालत के प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं-

मेट्रो और रेल सेवा: दिल्ली मेट्रो और रेलवे का संचालन सामान्य रूप से जारी रहेगा। किसी प्रतिबंध के लिए वैध कानूनी आधार जरूरी होगा।

इंटरनेट सेवा: इंटरनेट सेवाएं कानून के मुताबिक उपलब्ध रहेंगी। सक्षम प्राधिकरण को कानून के तहत प्रतिबंध लगाने का अधिकार रहेगा।

आवाजाही: दिल्ली में लोगों और वाहनों की आवाजाही पर अनावश्यक रोक नहीं लगाई जाएगी। बैरिकेडिंग की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।

गिरफ्तारी/हिरासत: किसी व्यक्ति को कानून से बाहर जाकर हिरासत में नहीं लिया जा सकता। हर कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन: कानूनी दायरे में शांतिपूर्ण सभा और प्रदर्शन की अनुमति रहेगी। BNSS की धारा 163 के तहत लागू वैध प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे।

अदालतों तक पहुंच: सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए परिसर के आसपास लगे धारा 163 से संबंधित पुराने नोटिस बोर्ड हटाने का निर्देश दिया गया।

वकील और पत्रकार: वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों के काम में बाधा नहीं डालने का आश्वासन अदालत ने दर्ज किया।

अवमानना मामला: 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन से जुड़ी अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया गया।

अनुपालन रिपोर्ट: अधिकारियों को 13 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें मेट्रो पर लगाए गए प्रतिबंधों और रेलवे से जुड़े परामर्शों का विवरण देना होगा।

हिरासत से जुड़े मामले: कथित सामूहिक हिरासत से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं की सुनवाई 13 अक्टूबर को मुख्य मामलों के साथ होगी।

अब अगली सुनवाई में सरकार को कथित हिरासत की परिस्थितियों और उसकी कानूनी वैधता पर अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।

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