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‘लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेपी जैसा साहस जरूरी’, रांची में डॉ. बब्बू ने बताई प्रासंगिकता

by उर्वशी शेखर
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लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर रांची के सतकनादु स्थित चित्रांश सिटी के समीप उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद ‘आज के राजनीतिक दौर में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता, भाजपा नेता और सामाजिक-वैचारिक संगठन रांची रिवोल्ट जनमंच के संयोजक डॉ. प्रणव कुमार बब्बू ने की। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण का जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों, आत्मनिर्भरता और आम नागरिक की भागीदारी का उदाहरण है।

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डॉ. बब्बू ने कहा कि जेपी की संपूर्ण क्रांति ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। समाज का प्रत्येक व्यक्ति जागरूक और सशक्त होकर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है। उनके मुताबिक, यही जनभागीदारी आगे चलकर आत्मनिर्भर समाज और मजबूत राष्ट्र की नींव बनती है।

उन्होंने कहा कि अन्याय, तानाशाही और गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ निर्भीक होकर आवाज उठाने का साहस जेपी के व्यक्तित्व की बड़ी विशेषता थी। मौजूदा समय में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए ऐसी ही सजगता और दृढ़ता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जेपी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनके विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन करते रहेंगे।

जेपी की विचारधारा को बताया देश की ताकत

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भाजपा झारखंड प्रदेश मंदिर-मठ प्रकोष्ठ के संयोजक संजय शौर्य ने कहा कि देश की स्वतंत्रता, संप्रभुता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में जयप्रकाश नारायण जैसे नेताओं के विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि आज भारत को दुनिया के अग्रणी और विकसित देशों की श्रेणी में ले जाने का सपना जिन मूल्यों पर आधारित है, उनमें जेपी की विचारधारा की छाप भी देखी जा सकती है।

कार्यक्रम में राकेश रंजन बब्लू, सूरज सिन्हा, उपेंद्र कुमार बब्लू, मंटू, संतोष, इजहार, मुनव्वर अंसारी, मोहम्मद कलीम, कंचन सिन्हा, पायल बनर्जी, तसव्वुर अंसारी, कामेश्वर लोहरा, मुतल्लिव अंसारी, मुखिया अजय उरांव, शकील अंसारी, संजीव कुमार सिन्हा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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