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SIR के बीच चुनाव आयोग में बड़ी फेरबदल, 20 महीने में करीब 20 राज्यों के CEO बदले

by उर्वशी शेखर
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देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच चुनाव आयोग में बड़े प्रशासनिक बदलाव हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच करीब 18 से 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) बदले गए। यह सिलसिला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फरवरी 2025 में पदभार संभालने के बाद जारी रहा।

राज्यों में बदलाव

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2025 में बिहार से CEO स्तर पर फेरबदल शुरू हुआ। इसके बाद नागालैंड, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर और लद्दाख समेत कई क्षेत्रों में नई नियुक्तियां हुईं। लक्षद्वीप में नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 के बीच तीन अधिकारियों ने यह जिम्मेदारी संभाली। कुछ अधिकारियों का कार्यकाल दो साल से भी कम रहा, जबकि सामान्यतः इस पद पर करीब तीन साल की निरंतरता को प्राथमिकता दी जाती है।

2026 में पंजाब, दिल्ली, गुजरात, सिक्किम और चंडीगढ़ के CEO बदले गए। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद तत्कालीन CEO मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव बनाया गया और उनकी जगह नीलम मणि को नियुक्त किया गया। केरल में अगस्त 2026 में डी. सजित बाबू ने रतन यू. केलकर का स्थान लिया।

मुख्यालय में भी नियुक्तियां

निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में उप निर्वाचन आयुक्त स्तर पर भी बदलाव हुए। रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 में भानु प्रकाश येतुरु, सितंबर 2025 में पवन कुमार शर्मा और अक्टूबर 2026 में प्रकाश राजपुरोहित की नियुक्ति हुई। संजय कुमार को अगस्त 2026 में वापस भेज दिया गया।

SIR से संबंध और आधिकारिक प्रतिक्रियाएं

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। इसके तहत अधिकारियों को सूची की जांच, संशोधन और प्रशासनिक समन्वय की निगरानी करनी होती है। आयोग ने छूटे मतदाताओं को शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।

विपक्षी दलों ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और लगातार तबादलों से प्रशासनिक निरंतरता पर चिंता जताई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सभी नियुक्तियों को SIR से जोड़ना उचित नहीं होगा। चुनावी कार्यक्रम, पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक जरूरतें भी तबादलों के कारण हो सकती हैं।

SIR का मामला न्यायिक स्तर तक पहुंच चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निलंबन की अंतरिम मांग पर आदेश देने से इनकार करते हुए आयोग और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। केरल विधानसभा ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया, जिसे इस तरह का पहला विधानसभा प्रस्ताव बताया गया है।

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