Wednesday, October 7, 2026
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1 अक्टूबर से बदलेंगे जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के नियम, जानें किसकी मंजूरी होगी जरूरी

by उर्वशी शेखर
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जन्म और मृत्यु के देर से होने वाले पंजीकरण को लेकर अब प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त होने जा रही है। Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से देशभर में लागू होंगे। गृह मंत्रालय के अधीन भारत के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय ने 16 सितंबर को जारी अधिसूचना में इस तारीख को कानून के लागू होने की घोषणा की है।

संशोधन का मुख्य असर उन मामलों पर पड़ेगा, जिनमें जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित समय के काफी बाद दी जाती है। खास तौर पर दो साल से अधिक पुराने मामलों में अब पंजीकरण की प्रक्रिया न्यायिक स्तर की मंजूरी से जुड़ जाएगी।

दो साल से ज्यादा देरी हुई तो मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य

नए प्रावधान के अनुसार, यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश के बाद ही किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों में अतिरिक्त न्यायिक जांच सुनिश्चित करना है।

यानी दो साल से पुराने किसी जन्म या मृत्यु रिकॉर्ड को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए दर्ज कराने के बजाय अब न्यायिक आदेश की आवश्यकता होगी।

एक से दो साल की देरी पर प्रशासनिक मंजूरी

वहीं, यदि घटना को हुए एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष से ज्यादा नहीं हुए हैं, तो पंजीकरण के लिए जिला स्तर के सक्षम अधिकारी की मंजूरी आवश्यक होगी।

इस श्रेणी में जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) अथवा DM द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट आदेश जारी कर सकेंगे। मंजूरी देने से पहले संबंधित जन्म या मृत्यु की जानकारी की सत्यता का सत्यापन किया जाएगा और निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा।

सरकार ने क्यों कड़ा किया विलंबित पंजीकरण का सिस्टम?

केंद्र सरकार ने संशोधन के जरिए जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड में देरी से होने वाली एंट्री के लिए ज्यादा सख्त सत्यापन व्यवस्था तैयार की है। सरकार ने संसद में विधेयक पेश करते समय समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देने, रिकॉर्ड की विश्वसनीयता मजबूत करने और देर से पंजीकरण के संभावित दुरुपयोग को रोकने की जरूरत पर जोर दिया था।

जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र विभिन्न सरकारी सेवाओं और नागरिक रिकॉर्ड के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। ऐसे में पुराने मामलों की एंट्री से पहले अतिरिक्त सत्यापन की व्यवस्था रिकॉर्ड की प्रामाणिकता से जुड़ी है।

जुलाई-अगस्त में संसद से मिली थी मंजूरी

Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 को 29 जुलाई को लोकसभा में पेश किया गया था। लोकसभा ने इसे 31 जुलाई को पारित किया, जबकि राज्यसभा ने 4 अगस्त को मंजूरी दी। राष्ट्रपति की स्वीकृति 6 अगस्त 2026 को दर्ज की गई।

अब केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद संशोधित कानून के सभी प्रावधान 1 अक्टूबर से प्रभावी होंगे।

आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?

  • समय पर पंजीकरण: जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित समय के भीतर देना सबसे सरल प्रक्रिया रहेगी।
  • 1 साल से अधिक और 2 साल तक की देरी: DM, SDM या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मंजूरी आवश्यक होगी।
  • 2 साल से अधिक की देरी: प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लेना होगा।
  • सत्यापन और शुल्क: विलंबित मामलों में रिकॉर्ड की सत्यता की जांच और निर्धारित शुल्क की प्रक्रिया लागू होगी।

इस बदलाव के बाद जितना अधिक पुराना जन्म या मृत्यु पंजीकरण का मामला होगा, उसे दर्ज कराने के लिए उतना ही उच्च स्तर की मंजूरी की जरूरत पड़ेगी।

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