भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी की निष्पक्ष चुनाव और सरकार की जवाबदेही को लेकर की गई टिप्पणी ने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल के जवाब में जोशी ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता के लिए चुनाव निष्पक्ष होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के उल्लंघन की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए।
जोशी ने किसी नेता या दल का नाम लेकर समर्थन नहीं किया। इसके बावजूद उनके बयान को राहुल गांधी द्वारा चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इसे राहुल गांधी के आंदोलन का प्रत्यक्ष समर्थन कहना फिलहाल उचित नहीं होगा।

जोशी इससे पहले भी मोदी सरकार की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने शिक्षा बजट, सरकारी स्कूलों की स्थिति और बढ़ते निजीकरण पर चिंता जताई है। पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी उन्होंने मौजूदा व्यवस्था की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से की है।
बद्रीनाथ धाम में तेज आवाज वाले डीजे कार्यक्रमों को लेकर उनकी आपत्ति ने भी भाजपा के भीतर और बाहर चर्चा बटोरी थी। ऐसे में निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर उनकी ताजा टिप्पणी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, जोशी ने राहुल गांधी या उनकी किसी मांग के समर्थन की स्पष्ट घोषणा नहीं की है।
हैदराबाद से विश्वनाथ देहाती की रिपोर्ट