Wednesday, October 7, 2026
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धारा 22-ए की जमीन पर घमासान! BRS ने मंत्री पोंगुलेटी के दावों पर उठाए सवाल

by उर्वशी शेखर
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तेलंगाना में धारा 22-ए के तहत प्रतिबंधित भूमि को लेकर कांग्रेस सरकार और भारत राष्ट्र समिति (BRS) के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी की ओर से इस मुद्दे पर दिए गए बयानों पर BRS ने कड़ा पलटवार करते हुए सरकार पर विधानसभा को वास्तविक स्थिति से भटकाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने मंत्री के उन दावों को भी खारिज किया, जिसमें प्रतिबंधित भूमि की समस्या की जिम्मेदारी पिछली BRS सरकार पर डालने की कोशिश की गई।

तेलंगाना भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान BRS विधायक दल के उपनेता टी. हरीश राव ने कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझने के बजाय इस समस्या के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने राजस्व मंत्री से पूछा कि आखिर प्रभावित लोगों की परेशानी दूर करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है और इसे कब तक पूरा किया जाएगा।

हरीश राव के मुताबिक, BRS ने कांग्रेस सरकार से सीधा सवाल किया था कि सत्ता में आने के बाद प्रतिबंधित भूमि की सूची में कितनी नई जमीन शामिल की गई। उनका आरोप है कि मंत्री ने इस सवाल का स्पष्ट जवाब देने के बजाय उन जमीनों का उल्लेख किया जो पहले से ही प्रतिबंधित सूची का हिस्सा थीं।

BRS नेता ने मंत्री के उस कथित स्वीकारोक्ति का भी मुद्दा उठाया, जिसमें 3 दिसंबर 2025 को प्रतिबंधित भूमि की सूची ऑनलाइन अपलोड किए जाने के दौरान जल्दबाजी या समय के दबाव में त्रुटियां होने की बात सामने आई थी। हरीश राव का कहना है कि यदि सूची में गलती हुई थी तो सरकार को प्रभावित जमीन मालिकों के प्रति जवाबदेही तय करनी चाहिए थी।

उन्होंने सवाल किया कि गलती स्वीकार करने के बावजूद प्रभावित लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी क्यों नहीं मांगी गई और गड़बड़ी दूर करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा क्यों घोषित नहीं की गई। साथ ही, उन्होंने सरकार से प्रतिबंधित सूची में शामिल की गई और बाद में हटाई गई जमीनों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।

‘अगर समस्या पुरानी थी तो कांग्रेस शासन में रजिस्ट्रेशन क्यों रुके?’

हरीश राव ने इस तर्क पर भी सवाल खड़ा किया कि धारा 22-ए से जुड़ी मौजूदा परेशानी BRS सरकार के कार्यकाल से चली आ रही है। उन्होंने पूछा कि यदि समस्या पहले से मौजूद थी, तो कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद भूमि पंजीकरण को लेकर इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें और विरोध क्यों सामने आए।

उन्होंने मंत्री के पूर्व बयानों का हवाला देते हुए कहा कि अगर मामला पूरी तरह पुरानी सरकार की व्यवस्था का परिणाम था, तो फिर मौजूदा सरकार की ओर से अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने, माफी मांगने और लोगों की शिकायतों के लिए टोल-फ्री नंबर जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी।

BRS ने स्पष्ट किया कि उसका रुख आरोप लगाने के बजाय सरकार से जवाबदेही और त्वरित समाधान की मांग करना है। हरीश राव ने मंत्री से आग्रह किया कि राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर प्रभावित जमीन मालिकों को राहत देने के लिए स्पष्ट रोडमैप और निश्चित समय-सीमा सार्वजनिक की जाए।

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