देश के कई राज्यों में विद्युत नियामक आयोगों में लंबे समय से रिक्त पदों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने झारखंड समेत 15 राज्यों और जम्मू-कश्मीर को नोटिस जारी कर इस स्थिति पर जवाब मांगा है।
मामला ‘एनर्जी वॉच डॉग’ की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि कई राज्यों में विद्युत नियामक आयोगों में जरूरी पद खाली हैं या पर्याप्त पद स्वीकृत ही नहीं किए गए हैं। इससे आयोगों का कामकाज प्रभावित हो रहा है और बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों के निपटारे में भी बाधा आ रही है।


मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने दलील दी कि नियामक संस्थाओं में आवश्यक कोरम नहीं होने की स्थिति में उपभोक्ता अपनी बिजली संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी मंच से वंचित रह जाते हैं।
याचिका में आयोगों की रिक्तियों को विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 21 से जोड़ते हुए सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियामक संस्थाओं को निष्क्रिय या कमजोर रखने से नागरिकों को समय पर राहत और न्याय मिलने का अधिकार प्रभावित होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश से जवाब मांगा है, उनमें झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। अब इन सरकारों को आयोगों में रिक्तियों और पदों की स्थिति पर अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।