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झारखंड में जमीन से जुड़े मामलों पर ACB की कार्रवाई तेज, 25 दिनों में कई गिरफ्तारियां

by उर्वशी शेखर
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झारखंड में जमीन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई तेज हुई है। पिछले 25 दिनों के दौरान अलग-अलग मामलों में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। इन मामलों में दाखिल-खारिज के लिए रिश्वत मांगने, राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी, वन भूमि के कथित अवैध कारोबार और राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में अनियमितता जैसे आरोप शामिल हैं।

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कार्रवाई के दायरे में राजस्व कर्मचारी, कार्यालयों में पदस्थापित कर्मी और जमीन के लेन-देन से जुड़े अन्य लोग आए हैं। एसीबी विभिन्न मामलों में दस्तावेजों की जांच के साथ आरोपियों की भूमिका का पता लगा रही है। एजेंसी की पड़ताल का एक अहम पहलू यह भी है कि कथित गड़बड़ियां व्यक्तिगत स्तर पर हुईं या उनमें अन्य लोगों की मिलीभगत थी।

रिश्वतखोरी और दस्तावेजों में गड़बड़ी पर कार्रवाई

राजस्व विभाग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर एसीबी ने चतरा और रांची से जुड़े मामलों में कार्रवाई की है। 15 सितंबर को चतरा सदर अंचल के राजस्व कर्मी सतीश कुमार को दाखिल-खारिज के लिए 15 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद 22 सितंबर को रांची के नामकुम अंचल से जुड़े मामले में तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार की गिरफ्तारी हुई। इस मामले में दाखिल-खारिज से संबंधित दस्तावेज गायब करने का आरोप है। जांच के दौरान रिकॉर्ड में हुई कथित गड़बड़ी और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

इन कार्रवाइयों से जमीन के राजस्व रिकॉर्ड और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसी की सक्रियता सामने आई है।

हजारीबाग में वन भूमि घोटाले की जांच तेज

हजारीबाग में वन भूमि से जुड़े कथित घोटाले के मामले में भी एसीबी ने कई गिरफ्तारियां की हैं। 23 सितंबर को कुलेश्वर प्रजापति को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 7 अक्टूबर को इसी मामले में विशेश्वर प्रजापति, शंकर प्रजापति और रामगति गुप्ता को हिरासत में लिया गया।

इस मामले में वन भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री और जमीन से संबंधित दस्तावेजों में हेरफेर के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी जमीन के स्वामित्व, रिकॉर्ड की वैधता और लेन-देन से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि जमीन के दस्तावेजों में कथित अनियमितताएं किस स्तर पर हुईं और इस प्रक्रिया में किन लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

NH-33 मुआवजा भुगतान में गड़बड़ी के आरोप

रामगढ़ जिले के मांडू क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (NH-33) के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से जुड़ा मामला भी एसीबी की जांच में है। करीब 1.92 एकड़ भूमि के मुआवजा भुगतान में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

इस मामले में 1 अक्टूबर को तत्कालीन अमीन बालेश्वर प्रसाद और भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान सहायक प्रवीण कुमार सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई की गई। जांच एजेंसी मुआवजे के निर्धारण, भूमि संबंधी दस्तावेजों और सरकारी राशि के भुगतान की प्रक्रिया की जांच कर रही है।

एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि मुआवजा वितरण के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं। साथ ही, कथित गड़बड़ी में संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और सरकारी राशि के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

चतरा के एसडीएम कार्यालय का प्रधान लिपिक भी गिरफ्तार

जमीन और सरकारी कार्यालयों से जुड़े मामलों में कार्रवाई के क्रम में 8 अक्टूबर को चतरा स्थित एसडीएम कार्यालय के प्रधान लिपिक बासुदेव राम को गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी के साथ एसीबी की हालिया कार्रवाई में शामिल आरोपियों की संख्या 10 हो गई है।

इसके अलावा, जमीन से जुड़े मामलों में तत्कालीन अंचल अधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा के खिलाफ भी जांच जारी है। जांच एजेंसी संबंधित मामलों में अधिकारियों की भूमिका और कथित अनियमितताओं के बीच संभावित संबंधों का पता लगाने में जुटी है। हालांकि, जांच पूरी होने और आरोप साबित होने से पहले किसी की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय नहीं माना जा सकता।

बिचौलियों और कथित गठजोड़ की भी पड़ताल

जमीन से जुड़े कामकाज में दाखिल-खारिज, रिकॉर्ड में सुधार और मुआवजा भुगतान जैसी प्रक्रियाएं आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। इन कामों को कराने के नाम पर पैसे मांगने और बिचौलियों के जरिए अनुचित लाभ लेने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

एसीबी की मौजूदा कार्रवाई में ऐसे लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जो सरकारी कर्मचारियों और जमीन से जुड़े आवेदकों के बीच संपर्क सूत्र के तौर पर काम करते हैं। एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित भ्रष्टाचार केवल संबंधित कर्मचारियों तक सीमित था या इसके पीछे अन्य लोगों का भी नेटवर्क सक्रिय था।

25 दिनों की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

लगातार गिरफ्तारियों के बीच अब जांच के अगले चरण पर नजर है। एसीबी की पड़ताल में सामने आने वाले दस्तावेज, भुगतान का ब्योरा और आरोपियों के बीच संभावित संपर्क आगे की कार्रवाई की दिशा तय कर सकते हैं।

जमीन के रिकॉर्ड से लेकर सरकारी मुआवजे तक फैले इन मामलों में जांच एजेंसी की कोशिश कथित अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ने और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की है। हालांकि, गिरफ्तारियां अपने आप में आरोप साबित होने का प्रमाण नहीं हैं। मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

25 दिनों में कब-कब हुई गिरफ्तारियां?

  • 15 सितंबर: चतरा सदर अंचल के राजस्व कर्मी सतीश कुमार की गिरफ्तारी।
  • 22 सितंबर: नामकुम अंचल से जुड़े मामले में तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार गिरफ्तार।
  • 23 सितंबर: हजारीबाग के वन भूमि घोटाले में कुलेश्वर प्रजापति गिरफ्तार।
  • 1 अक्टूबर: रामगढ़ के मांडू में NH-33 मुआवजा भुगतान मामले में तत्कालीन अमीन बालेश्वर प्रसाद और भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान सहायक प्रवीण कुमार सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई।
  • 7 अक्टूबर: हजारीबाग वन भूमि मामले में विशेश्वर प्रजापति, शंकर प्रजापति और रामगति गुप्ता गिरफ्तार।
  • 8 अक्टूबर: चतरा एसडीएम कार्यालय के प्रधान लिपिक बासुदेव राम गिरफ्तार।

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