Tuesday, October 6, 2026
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झारखंडी भाषाओं के संरक्षण की आवाज होगी बुलंद, 9 अक्टूबर को निकलेगी भव्य भाषा यात्रा

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झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण व विकास को लेकर 9 अक्टूबर 2026 को राजधानी रांची में भाषा यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा की शुरुआत मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से होगी। इसके बाद यह फिरायालाल और अल्बर्ट एक्का चौक होते हुए कोकर स्थित बिरसा मुंडा समाधि स्थल पहुंचेगी। आयोजकों के मुताबिक, यात्रा के जरिए झारखंडी भाषाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने और उनके संरक्षण की मांग को मजबूती देने का प्रयास किया जाएगा।

भाषाओं के लिए अलग अकादमी और बजट की मांग

झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा ने 5 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाषाओं से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने रखा। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि राज्य की भाषाएं यहां की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक पहचान का अहम हिस्सा हैं। इसलिए इनके संरक्षण को केवल आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, प्रशासन और शोध से जोड़कर ठोस नीति तैयार करने की जरूरत है।

उन्होंने झारखंडी भाषाओं के लिए अलग और प्रभावी भाषा अकादमी बनाने की मांग की। साथ ही प्राथमिक विद्यालयों से विश्वविद्यालयों तक इन भाषाओं के शिक्षण के लिए पर्याप्त शिक्षक और पद सृजित करने तथा सभी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर व्यापक राज्य भाषा नीति बनाने की बात कही।

मोर्चा ने भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए अलग बजट निर्धारित करने की भी मांग की है। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भाषा, साहित्य और संस्कृति से संबंधित कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने तथा नीति निर्माण में भाषाविदों, साहित्यकारों और विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

लोक परंपराओं के दस्तावेजीकरण पर जोर

भाषा से जुड़े लोक साहित्य, गीत, कथाओं, पारंपरिक ज्ञान और मौखिक परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की मांग भी उठाई गई। आयोजकों का कहना है कि तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में इन परंपराओं को संरक्षित करना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक झारखंड की भाषाई विरासत पहुंच सके।

आठवीं अनुसूची में आठ और भाषाओं को शामिल करने की मांग

बंधु तिर्की ने संथाली की तर्ज पर झारखंड की अन्य प्रमुख भाषाओं को भी संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए पहल करने की मांग की। इनमें कुड़ुख, मुंडारी, हो, खड़िया, नागपुरी, कुडमाली, खोरठा और पंचपरगनिया शामिल हैं।

इसके अलावा माध्यमिक आचार्य के चयनित 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी कर नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग भी रखी गई।

पारंपरिक अंदाज में निकलेगी यात्रा

आयोजकों के अनुसार 9 अक्टूबर की भाषा यात्रा में लोग पारंपरिक तरीके से शामिल होंगे। मोरहाबादी से शुरू होने वाली यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए बिरसा मुंडा समाधि स्थल तक पहुंचेगी। इस दौरान झारखंडी भाषाओं के अस्तित्व, संरक्षण और विकास को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षाविद प्रो. बीबी महतो, प्रो. खालिद अहमद, पूर्व कुलपति त्रिवेणी नाथ साहू और डॉ. सरस्वती गगरई समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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