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रांची के थानों में CCTV की बदहाल व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, SSP और गृह सचिव से मांगा जवाब

by उर्वशी शेखर
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डोरंडा थाने में नाबालिग के साथ मारपीट के मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने थानों और सड़कों पर सीसीटीवी कैमरों की कमी तथा बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं होगी, तो अपराध पर नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल होगा।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक, रांची के शहरी क्षेत्र के 25 थानों में से केवल 17 में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 29 थानों में यह सुविधा महज पांच थानों तक सीमित है।

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पंडरा ओपी, हिंदपीढ़ी, विधानसभा और एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण पुलिस प्रतिष्ठानों में भी कैमरे नहीं होने की जानकारी पर अदालत ने नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब थानों और सड़कों पर निगरानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं होंगे, तो अपराधियों की पहचान, दुर्घटनाओं में शामिल वाहनों का पता लगाने और कानून-व्यवस्था संभालने में पुलिस को कैसे मदद मिलेगी।

चेन स्नैचिंग की घटनाओं पर भी जताई चिंता

राजधानी में चेन स्नैचिंग सहित अन्य आपराधिक घटनाओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने चौक-चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत यह जानना चाहती है कि कितने कैमरे काम कर रहे हैं और निगरानी व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने एसएसपी, गृह सचिव और डीडीपी को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सीसीटीवी व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए निगरानी तंत्र का दुरुस्त होना जरूरी है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। इस दौरान कैमरों की उपलब्धता और उनकी कार्यशील स्थिति को लेकर प्रशासन की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

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